Header Ads

आसरा विवाद बना स्थानीय राजनीति का आसरा

gajraula-nagar-palika-asra-harpal-singh-kamil-pasha-land-dispute

पालिका परिषद के विवादित भूखण्ड पर आबाद शिवस्वरुप को कब्जा मिले या न मिले, यहां आसरा योजना के भवन बने या न बने लेकिन यह भूखण्ड ही अब स्थानीय राजनीति का केन्द्र बनता जा रहा है। आसरा ने नगर के दलित वोट बैंक पर कब्जा करने की इच्छा रखने वाले नेताओं को आसरा मुहैया कराने का रास्ता खोल दिया है। यह राजनीतिक रोटियां सेकने वालों के लिए अच्छा साधन बन गया है।

रविवार को इस भूखण्ड से थोड़ा दूर स्थित चामुण्डा मन्दिर पर भूखण्ड के कब्जेदार शिवस्वरुप के समर्थन में दलित समुदाय की एक बैठक हुई थी। यह बैठक भूखण्ड पर फिर से आसरा योजना के तहत निर्माण शुरु कराने के खिलाफ आयोजित की गयी थी। बैठक में ऐसे कई लोग भूखण्ड से उजाड़े शिवस्वरुप तथा दलित समाज के पक्ष में आ गये जो नगर पालिका अध्यक्ष पद की चुनावी दौड़ में शामिल होने के इच्छुक हैं। यह अलग बात है कि वे एक गरीब दलित के लिए न्यायिक पक्ष का समर्थन कर रहे हैं।

नगर पालिका में दलित सबसे बड़ा वोट बैंक है जबकि जाट और मुसलमान उसके बाद आते हैं। ऐसे में चुनावी दौड़ में शामिल होने वाले लोग शिवस्वरुप के पक्ष में खड़े हो रहे हैं। चेयरमेन हरपाल सिंह इस परंपरा में जो दो तरफा खेल खेलने का प्रयास कर रहे हैं, उसे लोग समझ चुके तथा इसका खामियाजा उन्हें चुनाव में भुगतना पड़ेगा। वे आसरा योजना में कमीशन खाने वाले इ.ओ. के साथ भी हैं और वर्षों से आसरा बने भूखण्ड से बेदखल किये जा रहे दलित से भी अपनत्व जताने का प्रयास कर रहे हैं।

पूर्व चेयरमेन अनिल कुमार गर्ग, अध्यक्ष पद का चुनाव हार चुके बसपा नेता कैलाश चन्द, पूर्व सभासद तथा बसपा नेता देवेन्द्र कुमार गुड्डू, जिला पंचायत चुनाव में जमानत जब्त कराने वाले जाफर मलिक, सभासद संजय अग्रवाल तथा सभासद अमरजीत सिंह आदि कई लोग दलितों की एकजुट के कारण शिवस्वरुप का पक्ष ले रहे हैं तथा इस सिलसिले में वे अभी तक शिवस्वरुप के साथ हैं। विदित हो विवादित भूखण्ड पर कई दशक से शिवस्वरुप दलित का कब्जा था। जिसे इ.ओ. ने आसरा योजना के तहत यह भूमि दान कर निर्माण के लिए दे दी थी। और पुलिस के बल पर शिवस्वरुप के परिवार को वहां से खदेड़ दिया था।

केवल अध्यक्ष पद के संभावित उम्मीदवार ही नहीं बल्कि कई मौजूदा सभासद और महिला सभासदों के पति भी शिवस्वरुप के पक्ष में उठ खड़े हुए हैं। इनमें अशोक कुमार दिले, जाफर मलिक, अमरजीत सिंह, अनिल कुमार अग्रवाल, देशवीर सिंह आदि के नाम शामिल हैं। इनमें से कई आगे सभासद और कई अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। ऐसे में दलित वर्ग से सहानुभूति के बिना वे कमजोर साबित होंगे। वे चाहेंगे के दलित उनका साथ दें। यही कारण है कि चौमुण्डा पर दलित समुदाय की बैठक में ये सभी लोग शिवस्वरुप के समर्थन में आ खड़े हुए।

देखते रहें अभी कई और स्थानीय नेता भी शिवस्वरुप के समर्थन में आयेंगे। आसरा योजना विवाद ने नगर पंचायत में विजय के आकांक्षी लोगों को एक बेहतर आसरा प्रदान कर दिया है।

सम्बंधित ख़बरें : 
इ.ओ. ने बोर्ड की सहमति के बिना भूखंड आवंटित कर दिया
कुछ तो है, जो गजरौला नहीं छोड़ना चाहते कामिल
मुन्ना आकिल का चुनाव खर्च भी पाशा ही उठाते हैं

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

गजरौला टाइम्स के ताज़ा अपडेट प्राप्त करने के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें.