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मौत के मुहाने पर मौजूद था बीकानेरवाला

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बीकानेरवाला रेस्टोरेंट में हुए अग्निकाण्ड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसके संचालकों को न तो अपने कर्मचारियों और न ही वहां आने वाले ग्राहकों की सुरक्षा की चिंता है। भले ही यहां हुई खतरनाक घटना से दो मजदूर ही घयल हुए हों लेकिन इससे यह बात सामने आ गयी कि दुघर्टना या अग्निकाण्ड से बचाव की यहां कोई भी उचित व्यवस्था नहीं है। यह तो संयोग ही था कि सिलेंडरों में आग लगने पर वहां उसे बुझाने का पुख्ता इंतजाम न होने के बावजूद बाहर से दमकल आने तक मात्र एक दो सिलेंडर ही फटे। यदि किसी कारण से उन्हें आने में और विलम्ब हो गया होता तो, बीकानेरवाला रेस्टोरेंट एक विशाल शवगृह स्थल बन गया होता।

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बीकानेरवाला में हुए भीषण अग्निकांड में वहां रखे कई गैस के सिलेंडर जल उठे थे. शुक्र था कि हादसे में किसी की मौत नहीं हुई.

कल्पना कीजिये इसी तरह की दुघर्टना यदि गर्मी के मौसम में हो गयी होता तो आग कितनी तेज होती, दुर्भाग्यवश जुबिलेंट तथा अग्निशमन विभाग की दमलें उस समय प्रायः आयेदिन होने वाले किसी अग्निकाण्ड में गयी होतीं, तो क्या सारे के सारे 28 सिलेंडर ही ध्वस्त नहीं हो सकते थे? तब क्या होता?

संचालकों से पूछा जाना चाहिए बिना गैस बुझाने के यंत्रों तथा उचित चौकीदारी के अभाव में इतना बड़ा जखीरा रेस्टोरेंट के करीब क्यों रखा गया है? यह राहत की बात है कि संयोग से बड़ी दुघर्टना नहीं हुई लेकिन बड़ी दुघर्टना को टालने का भी यहां इंतजाम न होना बहुत बड़ी गलती है। इसलिए अग्निशमन विभाग को रेस्टोरेंट संचालकों से इसका जबाव लेना चाहिए। पुलिस को भी इसमें कार्रवाई करनी चाहिए थी।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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