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चौधरी को यह कैसी श्रद्धांजलि?

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23 दिसम्बर को चौ. चरण सिंह की जयंती पर सभी दलों के नेताओं ने उनका स्मरण किया। उन्हें किसानों का मसीहा बताया। किसानों के हकों की लड़ाई लड़ रहे भारतीय किसान मजदूर संघ के नेता वीएम सिंह ने तो दिल्ली में किसानों की सभा कर एक नये राजनैतिक दल का ऐलान किया। देश के दोनों सबसे बड़े दल भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने भी किसानों के मसीहा को श्रद्धासुमन अर्पित किये। उन्होंने भारत के गांवों और किसानों के लिए चौधरी साहब के कार्यों की प्रशंसा भी की।

चौधरी कहा करते थे कि भारत के विकास का रास्ता देश के गांवों से होकर जाता है। वे शहरी विकास के बजाय ग्रामीण विकास के पक्षधर थे। उनका भारत गांवों में बसता था। आज के नेता भले ही उनके दिखाये मार्ग पर चलने का दंभ भरते हों लेकिन हकीकत कुछ ओर ही है।

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अमरोहा में चौधरी चरण सिंह को भाजपा द्वारा श्रद्धांजलि दी गयी.

शोर मचाया जा रहा है कि सौ स्मार्ट शहर बसाये जायेंगे। उसके लिए ब्लू प्रिंट तैयार होने में ही करोड़ों खर्च हो रहे हैं। सरकार गांवों के बजाय शहरी आबादी और धनी वर्ग को लाभ पहुंचा कर और धनवान बनाने के लिए रात-दिन एक कर रही है। गांव और गरीब हाशिये पर चले गये हैं। गरीबों और गांवों के हित साधन की कई प्रचलित योजनायें या तो बंद कर दी गयीं अथवा उनके आवंटित धन कम कर दिया गया है। किसानों और ग्रामीणों की दशा सुधारने की कोई मंशा सरकार की दिखाई नहीं दे रही।

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भारतीय किसान यूनियन ने भी चौधरी साहब को याद किया.

उत्तर प्रदेश में गन्ना मिल चालू हुए दो माह होने को हैं। करोड़ों टन गन्ना मिल खरीद चुके लेकिन किसानों को एक कानी कौड़ी देने की बात तो दूर अभी तक गन्ना मूल्य भी तय नहीं किया गया। पिछने सीजन का भी बकाया मिलों ने नहीं चुकाया। किसान आजकल सबसे बुरे हाल में है। गन्ना समितियों के संचालक और सभापति भी मौन हैं। जबकि ये लोग किसानों की वकालत करने के लिए होते हैं तथा किसानों के गन्ने से ही इनके लिए कमीशन कटता है। ये लोग भी मिल मालिकों के दबाव में खामोशी अख्त्यार कर चुके।

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गन्ना मूल्य घोषित करने के लिए इन लोगों को मिलों पर दबाव बनाना चाहिए। घटतौली और गन्ने की तस्करी के खिलाफ भी ये कोई कदम नहीं उठा रहे। चुनाव से पूर्व ये भी चौ. चरण सिंह के अनुयायी थे। कुर्सी मिलते ही किसानों को भूल गये। जबकि किसान नेता की जयंती पर ये सभी लोग किसानों की सेवा का स्वांग करते देखे गये। किसानों की कठिनाईयों को दूर कर उन्हें न्याय दिलाना ही चौधरी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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-जी.एस. चाहल.

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