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जाट राजनीति के पुर्नजागरण में नागपाल का अहम रोल

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चौ. चन्द्रपाल सिंह के नाम को आगे करने में पूर्व सांसद देवेन्द्र नागपाल की भूमिका अहम रही है। इस योजना में मिली सफलता से जहां सपा को लाभ होगा वहीं जाट समुदाय में नागपाल का सम्मान भी बढ़ेगा। जिले में राजनैतिक पटल पर श्रीहीन होते जा रहे जाट समुदाय का यह एक तरह पुर्नजागरण ही कहलायेगा।

थोड़ा पीछे मुड़कर देखें तो यहां आजाद भारत के इतिहास में जाट-मुस्लिम एकजुटता के चलते सांसद और विधायक के पद जाट और मुसलमानों की समान भागीदारी रही। इसी के साथ अविभाजित मुरादाबाद जनपद में सहकारी संस्थाओं की राजनीति पर तो जाटों का ही एकाधिकार रहा।

गन्ना समितियों पर भी यही लोग काबिज रहे। इफको के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ. नानक सिंह रहे।

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चौ. चन्द्रपाल सिंह गन्ना समिति से लेकर सांसद और मंत्री तक रहे। हरगोविन्द सिंह सांसद, बाबू महेन्द्र सिंह, नौनिहाल सिंह तथा कांसीराम और डा. हरि सिंह ढिल्लो विधायक रह चुके। परंतु पिछले काफी समय से जाट बिरादरी सांसद तो क्या विधायक भी नहीं दे सकी।

अब रेनू चौधरी के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का सपना पूरा होने से कम से कम एक जिला स्तरीय पद पर इस समुदाय का कब्जा होगा। यह लंबे समय से हमारी राजनैतिक शून्यता को भरेगा। इसके लिए जिले के जाट समुदाय को देवेन्द्र नागपाल और कमाल अख्तर के साथ विधायक अशफाक खां को भी गंभीरता से लेना होगा। देवेन्द्र नागपाल ने इसके लिए हर स्तर से संघर्ष किया है।

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-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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