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गजरौला में आवारा कुत्ते और समस्यायें

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आवारा कुत्तों के कारण गजरौला में लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह गलियों में इनके झुंड मिल जायेंगे जो मौका मिलते ही हमला करने से भी नहीं चूकते। एंटी रैबीज के इंजेक्शन भी अस्पतालों में आसानी से नहीं मिलते.

'निकाय निपटे कुत्तों से’
भाजपा के युवा नेता सोनू कश्यप का कहना है कि नगर और देहात में कई जगह आवारा कुत्तों का जमघट रहता है। ये कुत्ते राह चलते लोगों पर भौंकते हैं तथा काट भी लेते हैं।

बच्चे और बूढ़े इनका खास निशाना होते हैं। इसलिए इन लावारिस कुत्तों को काबू करने में स्थानीय निकायों को ध्यान देना चाहिए। इनकी संख्या घटाने के लिए नसबंदी अच्छा रास्ता है।

सोनू कश्यप ने कहा कि इन्हें वन विभाग वालों को संरक्षण में लेकर इनके पालन पोषण का दायित्व संभालना चाहिए। भूख और बीमारियों के कारण भी ये लोगों पर हमला कर देते हैं। कुत्तों के शिकार लोगों की सुरक्षा के साथ कुत्तों की सुरक्षा का दायित्व भी स्थानीय निकायों और वन विभाग पर है।

'बढ़ रहा है कुत्तों का आतंक’
बसपा के ब्राह्मण सेल प्रमुख मारुत प्रभाकर ने गली-मोहल्लों में मौजूद कुत्तों के झुंडों की गतिविधियों पर चिंता व्यक्त करते हुए स्थानीय निकायों से इसके निदान की मांग की है।

बसपा नेता ने बताया कि यह दिक्कत केवल हमारे नगर की ही नहीं बल्कि सभी जगह आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। कई स्थानों पर गली-मोहल्लों में कोई मेहमान या नया व्यक्ति किसी परिचित के यहां जाते हुए गुजरे तो उस के पीछे कुत्ते पड़ जाते हैं। पैदल ऐसी गलियों से गुजरना कठिन है। किसी परेशानी में किसी दूसरे मोहल्ले में अपने करीबी के पास जाना हो तो ये ऐसे आदमी के सामने एक नयी मुसीबत बनकर उसे घेर लेेते हैं। कई बार हमला कर घायल भी कर देते हैं। कुछ जगह बच्चों को मारकर कुत्ते खा चुके और लोगों पर हमलों की घटनायें अखबारों में पढ़ने को मिलती रहती हैं। इन कुत्तों को गंभीरता से लिया जाना जरुरी है। इनसे मुक्ति का उपाय जरुरी है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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