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सकीना के महबूब के आगे नहीं चला नागपाल और चन्द्रपाल का कमाल

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समाजवादी पार्टी ने अमरोहा जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कैबिनेट मंत्री महबूब अली की पत्नि सकीना बेगम को उम्मीदवार बनाकर जिले के दूसरे कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर से अधिक अहमियत देने का सन्देश दिया है।

कमाल अख्तर और विधायक अशफाक खां सकीना बेगम के बजाय पूर्व मंत्री चौ. चन्द्रपाल सिंह की पुत्रवधु रेनु चौधरी के पक्ष में थे, यह नाम पूर्व सांसद देवेन्द्र नागपाल की सहमति से आगे किया गया था।

सकीना बेगम का नाम पार्टी द्वारा तय किये जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि जिले में महबूब अली सपा के सबसे ताकतवर नेता हैं। सकीना का अध्यक्ष बनना तय है। उसके बाद अमरोहा जनपद की सपा राजनीति के केन्द्र में महबूब अली होंगे। जबकि कमाल अख्तर और उनके साथियों का कद घटेगा।

सपा के उच्च स्तरीय सूत्रों से पता चला है कि महबूब अली हाइकमान को यह समझाने में सफल रहे कि वे कमाल अख्तर तथा दूसरे सपा नेताओं के मुकाबले अधिक सदस्य जिताने में कामयाब रहे हैं।

वार्ड नौ में सपा उम्मीदवार ओमकार सिंह पहलवान के समर्थन में कमाल अख्तर और अशफाक खां ने जुलूस तक निकाला और वार्ड में सभायें कीं। उधर वार्ड 13 अशफाक खां का घरेलू वार्ड था जहां उन्होंने कामेन्द्र सिंह के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया जबकि देवेन्द्र नागपाल ने वार्ड दस में वेदपाल सिंह की जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। इतना कुछ होते हुए भी तीनों स्थानों पर सपा उम्मीदवार हार गये।

राहुल कौशिक का समर्थन प्राप्त वार्ड 11 का उम्मीदवार भी हारा जबकि सपा जिलाध्यक्ष विजयपाल सैनी अपनी पत्नि की पराजय भी नहीं बचा पाये।

चन्द्रपाल सिंह जाट बाहुल्य क्षेत्र के एक वार्ड में ही सक्रिय रहते हुए अपनी पुत्रवधु को जिता पाये।

जबकि महबूब अली अपनी पत्नि तथा पुत्र दोनों को तो विजयी बना ही सके बल्कि कई ऐसे उम्मीदवारों को भी परास्त कराने की चाल में सफल रहे, जिनसे उन्हें खतरा था। उन्होंने जिस चाणक्य नीति का सहारा लिया वह सपा हाइकमान की समझ में आ गयी।

हाइकमान ने पूरी नापतौल के बाद ही यह निर्णय लिया कि जिले में पार्टी को महबूब अली ही जीत दिला सकते हैं। इसलिए उन्हें ही मजबूत किया जाये।

लोकसभा चुनाव में भी भाजपा की आंधी के दौरान सपा उम्मीदवार को महबूब अली के क्षेत्र में भारी बढ़त मिली थी जबकि शेष चारों विधानसभा क्षेत्रों में, जिसमें कमाल अख्तर का विधानसभा क्षेत्र भी शमिल था, सपा उम्मीदवार बुरी तरह पिछड़ी थी। यह प्लस प्वाइंट भी सकीना के पक्ष में था।

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पंचायत चुनाव के दौरान ऐन मौके पर कमाल अख्तर को राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री और महबूब अली को कुछ हल्का मंत्रालय देना भी सपा हाइकमान की एक चाल थी। यह बार-बार चन्द्रपाल सिंह के लिए सिफारिश कर रहे कमाल अख्तर और अशफाक खां को शांत करने का पेचमात्र था।

इस पेच में ये फंस गये और समझने लगे कि महबूब अली का महत्व वास्तव में कम हो चुका इसलिए सकीना बेगम को नहीं आगे किया जायेगा।

पहले से तय स्क्रिप्ट के मुताबिक ग्राम पंचायत चुनाव परिणाम आते ही सकीना का नाम आगे कर दिया गया। इन चुनावों पर बुरा प्रभाव न पड़ने को ध्यान में रखते हुए यह घोषणा नहीं की गयी थी।

सपा हाइकमान के इस निर्णय से जहां महबूब अली के खेमे में हर्ष है, वहीं कमाल अख्तर और अशफाक खां निराश हैं तथा चौ. चन्द्रपाल सिंह और देवेन्द्र नागपाल के समर्थक भी मन मसोस कर रह गये हैं।

वैसे यह स्पष्ट है कि इससे यहां की सपा गुटबन्दी की खाई और गहरी होगी। सपा के पुराने नेताओं ने कहना शुरु कर दिया है कि अमरोहा जिले की सपा पहले जहां एक वर्ग विशेष के हाथ में थी, वह अब एक व्यक्ति विशेष की जेब में सिमट गयी है।

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-टाइम्स न्यूज़ ब्यूरो अमरोहा.

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