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धनौरा से फिर माया के लाल

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आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और सपा को पराजित कर सरकार बनाने के लिए बसपा तैयारी में जुट गयी है। इसी सिलसिले में बहनजी ने अपने खासमखास डा. संजीव लाल को एक बार फिर यहां से मैदान में उतारा है। यह तो समय आने पर पता चलेगा कि परिणाम कैसे रहेंगे लेकिन माया के इस लाल का मुख्य मुकाबला भाजपा के हरपाल सिंह से होगा। हालांकि यहां सपा और रालोद के उम्मीदवारों की अभी घोषणा नहीं हुई।

अभी तक यहां जिला पंचायत अध्यक्ष कमलेश आर्य के पति हेम सिंह आर्य बसपा उम्मीदवार थे। जिन्हें चुनावी समीक्षा के बाद हटाकर डा. सजीव लाल का नाम लाया गया है।

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बहुजन समाज पार्टी ने एक बार फिर से संजीव लाल पर भरोसा दिखाया है.

डा. लाल पिछले चुनाव में यहां से उम्मीदवार बनाये गये थे, प्रचार के दौरान उनके बेटे के हाथ में बागडोर थी। जिसका रवैया लोगों के प्रति उपेक्षापूर्ण था। चूंकि डा. लाल तत्कालीन बसपा सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त थे, ऐसे में उनके बेटे के दिमाग में यह भ्रम बैठ चुका था कि उसके पिता तो जीत ही जायेंगे। वह चुनाव प्रचारक की भूमिका में नहीं उतर सका।

एक बड़ी गलती डा. लाल यह भी कर बैठे थे कि उन्होंने कुछ लोगों के कहने पर पक्के पुल स्थित मजार के पास मस्जिद के सामने डांस पार्टी करा दी। जिससे मुस्लिम तबके में उनके खिलाफ रोष फैल गया। इससे यहां के सबसे बड़े वोट बैंक ने उनका सामूहिक बहिष्कार का एलान कर दिया। इसके पीछे सपा समर्थक उन तत्वों का हाथ जो बसपा को क्षति पहुंचाने के लिए डा. लाल के साथ मिल गये थे।

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इस मामले से डरी बसपा हाइकमान ने आननफानन में डा. लाल को मैदान से हटाकर हेम सिंह आर्य को उम्मीदवार बनाया। लेकिन तबतक बहुत देर हो चुकी थी।

मतदान से ठीक पहले का यह फैसला बसपा के लिए आत्मघाती था। आर्य को समय रहते मैदान में लाया जाता तो यह सीट बसपा को मिलती।

डा. लाल की नासमझी का खामियाजा हेम सिंह आर्य और बसपा दोनों को भुगतना पड़ा। क्या मायावती अपने लाल को यहां लाकर फिर से 2012 की गलती दोहराना चाहती हैं?

-टाइम्स न्यूज़ ब्यूरो मंडी धनौरा.

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