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एक बूढ़े नेता की जवान बेटे को नसीहत : फीकी पड़ती चमक की ओर मुलायम सिंह का इशारा

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समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश यादव को मौके-मौके पर नसीहत देते हैं। उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि उनका बेटा सबसे बड़े प्रदेश को संभाल रहा है और भविष्य में वह उनकी विरासत को भी उसी तरह संभालेगा, लेकिन पिता होने के कारण उनके लिए अखिलेश यादव अभी उतने परिपक्व नहीं।

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को अपने अनुभव के आधार पर भी महसूस होता होगा कि समाजवादी पार्टी जिस तरह पिछले कुछ सालों में अपने गिरते ग्राफ को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रही है उससे अखिलेश यादव अनजान हैं। इसलिए वे उन्हें याद दिलाते रहते हैं कि राजनीतिक तौर पर मजबूती के लिए ये चाहिए या वह चाहिए।

जब हाल में मुलायम सिंह ने अखिलेश यादव से कहा कि बड़े नेता बनने के लिए अन्य राज्यों का दौरा करना चाहिए तो उसपर उनकी मंशा का भी पता चला। उन्हें अपने बेटे को नसीहत देने की सार्वजनिक अवसरों पर क्यों जरुरत पड़ रही है? क्या बढ़ती उम्र का यह तकाजा है या कुछ ओर?

मगर एक बात साफ है कि अखिलेश यादव को मुलायम सिंह दूसरी बार मुख्यमंत्री जरुर देखना चाहते हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों की ओर बारीकी से नजर दौड़ायी जाये तो अखिलेश यादव के लिए दिन उतने अच्छे नहीं कहे जा सकते। उनकी पार्टी की ताकत धीरे-धीरे कम होती मालूम पड़ रही है। वे विकास की बातों को केन्द्र सरकार की तरह सिर्फ भाषणों तक सीमित रख रहे हैं।

किसानों और गरीबों की बात को सभी सरकारें करती हैं और चीख-चीख कर कहती रही हैं। किसान पहले से अधिक बदहाल हुए हैं और गरीब पहले से अधिक गरीब।

एक बूढ़ा राजनीतिक खिलाड़ी अपने जवान बेटे को नसीहत देकर शायद इशारा करने की कोशिश में हो कि जनता पर उसकी चमक फीकी पड़ रही है। बहुजन समाज पार्टी या भाजपा की ओर दूसरी पार्टियों के नेताओं का भागना या भागने की तैयारी करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अखिलेश यादव की सरकार ने वादों को ठीक से नहीं निभाया।

बुंदेलखंड के किसानों को क्या फायदा मिला इस सरकार में यह उन किसानों से जाकर पूछा जा सकता है। सबसे ज्यादा किसान कहां मरे इसका सभी को पता है और उसके पीछे क्या कारण रहे यह भी हर कोई जानता है।

सरकारें किस तरह काम करेंगे यह उन्हें चलाने वालों को पता है। उन्हें यह भी मालूम होना चाहिए कि विकास किस तरह किया जाये।

गाल बजाने से एक बार चुनाव जीता जा सकता है, बार-बार नहीं।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम के लिए हरमिन्दर सिंह.