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सपा और भाजपा के खिलाफ फरवरी से उग्र आन्दोलन छेड़ेंगे यूपी के किसान

सपा और भाजपा के खिलाफ फरवरी से उग्र आन्दोलन छेड़ेंगे यूपी के किसान

किसानों की समस्याओं के समाधान के प्रति उदासीन राज्य और केन्द्र सरकार के खिलाफ किसानों का गुस्सा चरम पर है। दोनों ही सरकारें किसानों की मूल समस्याओं से उनका ध्यान हटाने के लिए उनकी हमदर्दी का ढोंग करने से भी बाज नहीं आ रहीं।

किसान केवल यह चाहता है कि उसकी फसलों का उचित तथा लाभकारी मूल्य मिले। साथ ही उधार के बजाय उसका भुगतान नकद होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश की सपा सरकार हो या केन्द्र की भाजपा सरकार हो, दोनों ही चुनाव में वादा करने के बावजूद अपनी बात से पीछे हट गयी हैं और किसान को उसके भाग्य के भरोसे छोड़ दिया है।

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उनकी एक ही गलती है कि वे नेता नहीं, किसान हैं

लगातार दस दिन तक गन्ना मूल्य तय करने और पिछला बकाया देने की मांग को लेकर अमरोहा में कलैक्ट्रेट में ठिुठरन भरी सर्दी में किसान धरने पर बैठने के बाद तब उठ गये जब सरकार ने लगातार तीसरी बार एक जैसा ही गन्ना मूल्य दिलाने की घोषणा कर दी।

किसानों ने मूल्य संतुष्टि पर धरना नहीं उठाया बल्कि इस बात से दुखी होकर वे उठे हैं कि सरकार सीधी उंगली से नहीं मानने वाली, अब गंभीरता से विचार कर दूसरा तरीका निकाला जायेगा।

भारतीय किसान यूनियन के बड़े नेता अब प्रदेश में विशाल किसान आंदोलन की तैयारी में जुटेंगे। अमरोहा जिले के किसान चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन छेड़ चुके हैं। यहां के किसानों में क्रांतिकारी जज्बा है। रजबपुर आंदोलन संघर्ष के दौरान चौ. टिकैत यह कहने को मजबूर हो गये थे कि मुरादाबाद जिले के किसान वाकई क्रांतिकारी हैं। उस समय अमरोहा व संभल, मुरादाबाद जिले की तहसीलें थीं।

आंदोलन की रणनीति से पूर्व भाकियू, रालोद नेताओं तथा उसके समानांतर संगठनों भानु गुट, हरपाल सिंह गुट तथा राकिमसं के नेताओं से भी बात करेगी।

भाकियू नेता समझ चुके हैं कि विभाजित किसान संगठनों से किसानों की लड़ाई कमजोर पड़ी है। बिना एकता के फतह संभव नहीं। रालोद और भाकियू में कलैक्ट्रेट पर धरने के दौरान ही सहमति बन चुकी है। यदि वीएम सिंह का संगठन इनके साथ नहीं भी आया और बाकी एक साथ एक मंच पर आ गये तो किसानों के हितों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जा सकती है।

एक फरवरी से आंदोलन का ऐलान इसीलिए किया गया है ताकि इस अंतराल में इसके लिए गहन मंथन और एक मजबूत रणनीति तय की जाये। नरेश टिकैत के मुख्यालय सिसौली तथा चौ. विजयपाल सिंह के किसान भवन फत्तेहपुर से विभिन्न किसान नेताओं में सामंजस्य के लिए भेजे दूतों की जानकारी मिली है।

एक वर्ष में विधानसभा चुनाव होने के कारण सरकार को बाध्य किया जाना मुमकिन हो सकता है। भाकियू नेता समझ रहे हैं कि यदि सरकार ने उनकी सुनवाई नहीं की तो चुनाव में किसान सपा और भाजपा दोनों ही सरकारों को सबक सिखा कर अपना हिसाब चुकाने में पीछे नहीं रहेंगे। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में किसान बड़े आंदोलन की तैयारी पर हैं।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम अमरोहा.