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जम्मू-कश्मीर की सियासत : महबूबा मुफ्ती की खामोशी बहुत कुछ कहती है

जम्मू-कश्मीर की सियासत : महबूबा मुफ्ती की खामोशी बहुत कुछ कहती है

जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी के साथ अपने गठबंधन को आगे बढ़ाने को लेकर पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती असमंजस में नजर आ रही हैं। ऐसा लगता है कि वे 'हां’ और 'ना’ के फेर में फंस रही हैं।

जबकि दूसरी ओर से यह भी चर्चा है कि महबूबा मुफ्ती अपनी कुछ शर्तों को लेकर अभी स्थिति साफ करने के मूड में नहीं हैं। भाजपा भी सोच रही है कि वह किसी तरह महबूबा को मना लें। उन्हें लगता है कि उनके साथ ही उनका गठबंधन ठीक ढंग से चल सकता है।

भाजपा को यह भी डर है कि महबूबा मुफ्ती के अलग होने से जम्मू-कश्मीर में उनकी सरकार नहीं रहेगी। भाजपा के नेताओं का कहना है कि वे अभी इंतजार करेंगे। मगर इंतजार लंबा होगा तो संशय भी बढ़ता जायेगा।

पीडीपी की ओर से कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री मोहम्मद सईद के निधन के बाद सरकार बनाने में समय लग रहा है। आधिकारिक शोक की अवधि सात दिन की है। उसके बाद महबूबा मुफ्ती और उनकी पार्टी के अन्य सदस्य औपचारिक तौर पर हर बात स्पष्ट कर देंगे। महबूबा मुफ्ती भी स्वयं अभी कुछ बोल नहीं रही हैं।

पीडीपी का कांग्रेस के साथ पहले सरकार चलाने का अनुभव रहा है। महबूबा मुफ्ती और सोनिया गांधी की पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में मुलाकात भी हुई थी। उस बीस मिनट की मुलाकात को शोक संवेदना व्यक्त करने के उद्देश्य से की गयी बातचीत करार दिया गया था। महबूबा मुफ्ती से मिलकर सोनिया गांधी की जो बात हुई उसपर चर्चायें उसदिन से ही शुरु होने लगी थीं।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम के लिए एम.एस. चाहल.