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वहां तो तेल पानी की तरह सस्ता हो रहा है, भारत में महंगा हो रहा है

वहां तो तेल पानी की तरह सस्ता हो रहा है, भारत में महंगा हो रहा है

तेल की कीमतें गिर रही हैं। अमेरिका में तो तेल की कीमत मानो पानी की तरह हो गयी है। वहां तेल से संबंधित उत्पाद सस्ते हो गये हैं। भारत सरकार तेल की कीमतों को कम करने को राजी नहीं है। वह तो महंगे तेल बेचने से बच रहे पैसे से देश की अर्थव्यवस्था सुधारने की बात कह रही है।

अमेरिका में एक गैलन गैस की कीमत 1 डॉलर हो गयी है। वह भारत के हिसाब से 67 रुपये बैठती है।

एक डॉलर में 3.78 लीटर पैट्रोल मिल सकता है।

कच्चे तेल में इतनी गिरावट देखी नहीं गयी थी। दशकों पहले के दाम की तर्ज पर तेल बिक रहा है।

अमेरिका में तो कुछ जगह तेल लगभग पानी के भाव में मिल रहा है। आने वाले दिनों में माना जा रहा है कि तेल कहीं जूस, सेब, संतरे या पानी की बोतल की कीमत के बराबर न हो जाये।

लेकिन जानकार यह भी कहने से पीछे नहीं हट रहे कि तेल के दाम बढ़ेंगे, मगर उतने नहीं। गैस के दाम हालांकि 1 डॉलर प्रति गैलन से कम हो सकते हैं, जो 1990 के बाद से नहीं देखे गये। मगर बढ़ेंगे तो भी तेल की कीमत 20 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। कुछ जानकारों का कहना है कि 15 या 16 डॉलर प्रति बैरल तक कीमतें हो सकती हैं।

2008 में तेल की कीमतें 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची थीं। तबसे अबतक लगभग 90 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गयी है।

अमेरिका में तेल उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। उसने अपनी तकनीकों को पहले से अधिक विकसित किया है। कम खर्चे में अधिक तेल निकाला जा रहा है।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम के लिए मोहित सिंह.