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उत्तर प्रदेश विधानसभा : चुनावी साल है और हंगामे तैयार

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उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र का पहला ही दिन हंगामेदार गुजर गया। विपक्षी पार्टियां अखिलेश सरकार के सामने खुलकर आ गयी हैं। भाजपा और मुलायम सिंह यादव के 'गठबंधन’ का आरोप विपक्ष पहले ही लगा चुका है। उसके संकेत विधानसभा हंगामे के दौरान देखने को मिले।

बहुजन समाज पार्टी कह रही है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने गठजोड़ कर लिया है। उनका हाथ मिलाना यहां की कानून व्यवस्था को खराब कर रहा है।

बसपा के विधायकों ने कहा कि राज्यपाल राम नाईक का अभिभाषण 'झूठ का पुलिंदा’ है। जमकर हुई नारेबाजी और हंगामे के बीच राज्यपाल अभिभाषण की औपचारिकता ही पूरी कर पाये।

दलितों पर अत्याचारों और गन्ने किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए बसपा के स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा कि मुसलमानों की उपेक्षा की जा रही है।

कांग्रेस ने भी किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यपाल सरकार की तारीफ कर रहे हैं और बुंदेलखंड का किसान रो रहा है।

बहुजन समाज पार्टी कह रही है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने गठजोड़ कर लिया है


वहीं भाजपा ने किसानों की बात न करते हुए पंचायत चुनावों की धांधली की बात की। भाजपा अभिभाषण पर शांत रही और उसे सुनती रही।

रालोद के नेता दलवीर सिंह ने कहा कि पिछले तीन सालों में समाजवादी पार्टी के शासन में किसानों को गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिल सका। मूल्य नहीं बढ़ाया गया तथा बकाया का भुगतान नहीं हुआ।

साल चुनावी है। यह बजट सत्र का पहला दिन था और इतना हंमागा हुआ। राज्यपाल के खिलाफ जमकर नारेबाजी के बीच विधानसभा को 7 फरवरी तक के लिए स्थगित करने की नौबत आयी। बजट सत्र 11 मार्च तक चलेगा। समाजवादी पार्टी के लिए कई अहम बिलों को पास कराना बहुत बड़ी चुनौती होगी। अखिलेश यादव आम बजट 11 फरवरी को पेश करेंगे। उसमें कुछ ऐसे ऐलान करने की चर्चा है जिससे सरकार को चुनाव में फायदा मिल सके, मगर मौजूदा हालात और सरकार के पिछले क्रियाकलापों को देखकर नफा हो न हो, मगर नुकसान की गुंजाइश ज्यादा है।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम के लिए एम.एस. चाहल.