जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव : महिलाओं की जीत और रिमोट की राजनीति

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में महिलाओं की जीत और रिमोट की राजनीति

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में 59 फीसदी सीटों पर महिलायें विजयी हुई हैं। कुल 74 सीटों पर 44 पद महिलाओं के खाते में गये हैं। इससे कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर महिलाओं का झंडा लहराया है। लेकिन सवाल वहीं खड़ा है कि क्या महिलायें अपनी कुर्सी खुद संभालेंगी या उनके पति, पिता या परिवार के अन्य सदस्य उन्हें रिमोट की तरह इस्तेमाल करेंगे?

उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव संपन्न हो गये हैं। समाजवादी पार्टी ने 74 जिलों में 59 सीटों पर जीत हासिल की है। बाकी सीटों पर बसपा, कांग्रेस, भाजपा, रालोद और सपा के बागी जीते हैं।

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव : कभी वे भी अपने थे, आज हैं पराये

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प्रदेश की 74 सीटों में से केवल 30 सीटों पर पुरुष उम्मीदवार विजेता बने हैं। उनका प्रतिशत 41 रहा है। जबकि महिलाओं का विजय प्रतिशत 59 रहा है।

23 महिलायें निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनी हैं। मतदान होने पर 21 महिलाओं ने अपने प्रतिद्वंदी को पराजित किया है।

रिमोट की राजनीति

चुनावों में जब महिलाओं की जीत होती है तो सवाल उठाये जाते हैं। अधिकतर देखा गया है कि महिलाओं को कुर्सी पर किसी तरह पहुंचाया तो जाता है, लेकिन कुर्सी का रिमोट पुरुषों के हाथ में रहता है। महिलायें एक तरह से रबर स्टांप की तरह काम करती हैं। उनकी राय जानने या न जानने की कोशिश नहीं की जाती, बल्कि वे परिवार के पुरुष सदस्यों की राय लेकर काम करती हैं या उनपर वे अपनी सोच थोप देते हैं।

रिमोट की राजनीति के कारण महिलाओं को राजनीति में अपनी तरफ से काम करने की आजादी छीन ली जाती है। वे निर्णय स्वयं लेने में अक्षम दिखायी देती हैं और इससे पुरुषों का वर्चस्व बना रहता है। फिर कंधे से कंधा मिलाने की बात कहना बेमानी प्रतीत हो जाता है।

हालांकि कुछ महिलायें पुरुष वर्चस्व को चुनौती देती हैं लेकिन उनकी तादाद प्रायः कम होती है।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम.

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