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भाजपा के नेता सुब्रमण्यम स्वामी सुर्खियां में रहते ही हैं। वे कुछ बोले या न बोलें, उन्हें सुर्खियों में रहना पड़ता है। ऐसा या तो वे अपने बयानों के द्वारा करने की सोचते हैं या उनके विपक्ष के लोग उनके लिए सुर्खियां तैयार करने की कोशिश करते हैं।

ताजा घटना में उनकी कार पर अंडे और टमाटर फेंके गये। जिन्हें पता नहीं था, इसके बाद वे भी जान गये कि स्वामी उत्तर प्रदेश में गये हैं। बताया गया कि लोग कांग्रेसी थे। जबकि उन्होंने कहा कि वे कोई ओर थे, भाजपा उन्हें नाहक बदनाम कर रही है। उन्होंने स्वामी को काले झंडे भी दिखाये। इतने से काम नहीं बना तो उन्होंने काली स्याही तक फेंकने की कोशिश की।

बाद में पुलिस ने बल प्रयोग किया तो प्रदर्शनकारी उसके विरोध में धरने पर बैठे।

उधर स्वामी ने सर्किट हाउस में कहा कि जेएनयू में देशद्रोही ज्यादा हैं, जबकि पूरे देश में उनकी संख्या पांच फीसदी है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने लगता है सर्वे कराया हुआ है। उन्हें यह भी पता है कि उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और मऊ जिले में देशद्रोही रहते हैं। वे यही मानते हैं कि जेएनयू में देशद्रोहियों की संख्या अधिक है।

आने वाले दिनों में भारत की राजनीति आक्रामक, निष्ठुर और अधिक रोमांचक होती जायेगी


भारत में सियासत अजीब मोड़ पर दौड़ रही है। उसकी पटरियां बिछी हैं ऐसे तरीके से की, उन्हें आसानी से उखाड़ा न जा सके। यदि कोई गाहे-बगाहे उखाड़ भी ले, तो कामगार काम पर हैं, फिर बिछा देंगे।

लेकिन उत्तर प्रदेश में सियासत की गर्मी चुनाव की तारीख को भांप रही है। विधानसभा चुनाव में भाजपा के पास यहां अपनी ताकत दिखाने का पूरा मौका है। सपा तो पहले से ही उसके लिए नर्म होने के आरोप झेल रही है। मायावती को स्मृति ईरानी ने तीखेपन का डोज दे दिया है, जिसका असर उलटा हो सकता है। दलित वोट बैंक भाजपा से जहां बिहार में बिखर गया था, लोकसभा की तरह अब वह लगता नहीं कि उसके पास वापिस आ सकता है।

एक बात माननी पड़ेगी कि स्वामी का देशद्रोही फैक्टर जारी है। वे तीर को निशाने पर साधने की कोशिश के आरोपों को झेलने को तैयार हैं।

-हरमिन्दर सिंह.