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अमर-प्रेम की दास्तान : ...लेकिन अमर बाबू राजनीति में दिल से बड़ा दल होता है

अमर-प्रेम-की-दास्तान

अमर सिंह की मुस्कान में जो पहले फीकापन आया था, अब लगता है दूर हो रहा है। यह प्रक्रिया धीमी है, धीमी होनी चाहिए और ऐेसे मामलों में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।

अमर-प्रेम की दास्तान पुरानी है। यह तब की बात कही जा सकती है जब दो दोस्त इतने पक्के थे कि उनकी कहानियां दूसरों के लिए मिसाल हुआ करती थीं। वक्त बदला, मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह की जोड़ी में 'ब्रेकअप' की चर्चायें उन दिनों राजनीति में गर्म खबर थी।

राजनीतिक गर्मी की शुरुआत : मौसम खिल गया है, आओ दिल की बात करें


गर्म खबर को और ताप देने के लिए अचानक कहीं से आजम खां नामक एक नेता आये। फिर क्या था, गर्म खबर की गर्मी ने दो जनों को दूर कर दिया।

शुरु में वियोग, बाद में भूल जाना। ऐसे ही कई साल बीत गये।

एक दिन अचानक ऐसा हुआ कि पुरानी यादें, वे लम्हें, वह प्रेम, वह दोस्ताना फूट पड़ा। मुस्कानों की कलियां खिलने लगीं। दिलों की धड़कनें बढ़ने लगीं। आंखों में एक नयी चमक थी। उम्र का तकाजा भी था, पर कोई बात नहीं, दिल जवान तो, हम जवान।

वह झोंका प्यार की बहार का था। वह झोंका इकरार का था। इंकार तो कभी हुआ ही नहीं था।

बेकग्राउंड में संगीत धीमा था -'प्यार हुआ, इकरार हुआ...।’

राजनीति में प्यार-मोहब्बत की जगह नहीं होती, ऐसा मैंने आजतक सुना है। राजनीति में आया नहीं, न कोई इरादा, इसलिए भुगता नहीं।

मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव कह रहे हैं,'वे नेताजी के दिल में रहते हैं। नेताजी का दिल पार्टी से बड़ा है।’

वाह, क्या बात है।

दिल मिल गये, फूल खिल गये, दूसरे जल गये।

मुलायम-सिंह-अमर

मुझे लगता है कि मुलायम सिंह के दिल से कभी अमर सिंह दूर गये ही नहीं थे। वो तो हम मीडिया वाले बीच में यूं ही आ गये थे।

कहीं फिर से ब्रेकिंग न्यूज न चल जाये,'मीडिया ने तुड़वाया था वर्षों का लंबा याराना।’

आजम साहब किसी सोच में हैं। विचारों की घाटियां तनहाई में जी रही हैं, मालूम नहीं, लेकिन वक्त ने दूरियां मिटायी ही कब थीं।

अमर सिंह बोले,'दिल में हूं, दल में रहूं न रहूं, क्या फर्क पड़ता है।’

अमर बाबू सही बोले, तमाशा फिल्म का गाना उन्हें जरुर सुनना चाहिए -

तेरी नज़रों में है तेरे सपने,
तेरे सपनों में है नाराजी,
मुझे लगता है के बातें दिल की,
होती लफ्ज़ों की धोखेबाज़ी,
तुम साथ हो न हो, या न हो, क्या फर्क है,
बेदर्द सी जिंदगी, बेदर्द है,
अगर तुम साथ हो...।’

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम के लिए हरमिन्दर सिंह.