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गजरौला में दर्जन भर फैक्ट्रियां बंद : हजारों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि कंकरीट के जंगल में तब्दील

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औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक इकाईयां एक-एक कर दम तोड़ती जा रही हैं। तीन दशक पूर्व घोषित इस औद्योगिक क्षेत्र में अबतक एक दर्जन से अधिक इकाईयां दम तोड़ चुकीं तथा कई अंतिम सांसें गिनना शुरु कर चुकी हैं। दो वर्ष पूर्व स्थापित परिशुद्ध मशीन टूल्स इकाई को छह माह पूर्व बन्द कर उसके प्रबंधक और तमाम कर्मचारी गायब हो गये। यह इकाई 30 बीघा बेहद उपजाऊ कृषि भूमि पर लगायी गयी थी। अबतक लगभग एक हजार बीघा कृषि भूमि पर लगी एक दर्जन से अधिक इकाईयां बंद होने से उत्तर  प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम, कई बैंकों तथा सैकड़ों किसान परिवारों को नुकसान उठाना पड़ा है।

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बंद होने वाली बड़ी इकाईयों में श्री एसिड्स एंड कैमी. लि., बेस्ट बोर्ड्स लि., रतन वनस्पति, शिवालिक सेल्यूलोज लि., एसएस ड्रग्स, सिद्धार्थ स्पिन फैब, सीएनसी मैटल, गुरमेक्स बियरिंग लि., यूएस फूड्स लि., केमचूरा लि., परिशुद्ध मशीन टूल्स आदि कई नाम शामिल हैं।

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ये सभी इकाईयां यहां की बेहद उपजाऊ कृषि भूमि पर लगायी गयी थीं। जहां उड़द, चना, अरहर, मूंग जैसी दलहन फसलों के अलावा गन्ना और धान की बेहतर फसलें उगाई जाती थीं। यह भूमि किसानों से अधिगृहीत कर  उद्योगपतियों को दी थी। बैंकों से ॠण लेकर उद्योग लगे। जितने उद्योग लगते गये उतने ही बंद होते गये।

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फिलहाल किसी नये उद्योग लगने की खबर नहीं। जबकि चालू इकाईयों में इंश्लिको लि. और कोरल न्यूज प्रिंट लि. की हालत खस्ता चल रही है। यहां की सबसे बड़ी इकाई जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लि. के भी कई प्लांट बंद हो चुके।

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बंद हो चुकी इकाईयों से जहां बड़े पैमाने पर मजदूर बेरोजगार हुए हैं, वहीं हजारों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि कंकरीट के जंगलों में तब्दील हो चुकी। ऐसे में जहां हजारों मजदूर  बेरोजगार हुए वहीं कृषि भूमि पर अब फसलें भी नहीं उगाई जा सकतीं। यहां के औद्योगीकरण ने जहां बैंकों और किसानेां को आर्थिक हानि पहुंचायी वहीं रोजगार की राह देख रहे बेरोजगारों का भी कोई भला नहीं हो पाया। गजरौला का औद्योगीकरण यहां के लिए एक अभिशाप बनकर रह गया है।

कई सौ एकड़ कृषि भूमि UPSIDC द्वारा अधिगृहीत हुई खाली पड़ी है। जिसपर वर्षों से नये उद्योग स्थापित होने की प्रतीक्षा है। परंतु कोई भी उद्योगपति यहां उद्योग लगाने का इच्छुक नहीं लगता।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम गजरौला.