गजरौला में चेयरमेन और सभासद बदल जाते हैं, इ.ओ. नहीं बदला

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वांछित परिणाम न मिलने पर लोग पांच साल में चेयरमेन और सभासदों को तो बदलते रहे हैं लेकिन गजरौला की प्रशासनिक इकाई का मुखिया बदलने की उसमें या तो ताकत नहीं है या इच्छाशक्ति का अभाव है।

1986 से लेकर यहां अनिल कुमार गर्ग, जसराम सिंह, महेन्द्र सिंह, रोहताश कुमार शर्मा तथा हरपाल सिंह समेत पांच अध्यक्ष और सिराज अहमद तथा राजकुमार अग्रवाल, दो कार्यवाहक अध्यक्ष रह चुके।

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कुछ समय बीच में प्रशासक भी नियुक्त किया गया। अधिकांश सभासदों को भी जनता ने दोबारा मौका नहीं दिया। परंतु गजरौला का दुर्भाग्य है कि विगत चौदह वर्षों से यहां कामिल पाशा नामक इ.ओ. ज्यों का त्यों नियुक्त है। पांच वर्षों से अधिक एक कर्मचारी का एक ही स्थान पर डटा रहना सरकारी भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण है। तो फिर जिस कार्यालय का प्रमुख ऐसा व्यक्ति होगा, तो वहां काम करने वाले बाकी लोगों का क्या हाल होगा? कहने की जरुरत नहीं।

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कुछ तो है, जो गजरौला नहीं छोड़ना चाहते कामिल

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-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम गजरौला.

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