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गजरौला नगर पालिका परिषद ने पानी के लिए पानी की तरह पानी में बहाये लाखों

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लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद पालिका परिषद लोगों को पीने का स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में विफल है। पहले ही वायु प्रदूषण की मार झेल रहे गजरौला वासी पीने के स्वच्छ जल के मोहताज हैं। प्रदूषित जल का सेवन करने से नगरवासी कई भयंकर रोगों के शिकार होते जा रहे हैं। भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ डूबी गजरौला नगर पालिका परिषद द्वारा कुछ स्थानों पर पीने के पानी के लिए लगायी स्वचालित शुद्ध प्याऊ गंदा पानी देने के बाद एक माह बाद ही ठप्प हो गयीं। इन्हें खरीदने में लाखों रुपये पानी की तरह बहाये गये थे। ऊंचे दामों के बिलों पर सस्ते मूल्य पर बेहद घटिया प्याऊ खरीदी गयी थीं।

गजरौला के चेयरमेन हरपाल सिंह घिर गये महिलाओं में


नगर पंचायत से हाल में नगर पालिका बनने वाले गजरौला में तीन तरह से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। ओवर-हैड टैंकों द्वारा नगर के अधिकांश मोहल्लों में पाइप लाईन बिछाकर घरों में पेयजल कनेक्शन पालिका द्वारा दिये गये हैं। बार-बार इस प्रणाली से की जा रही जलापूर्ति न होने की आम शिकायते हैं। कई बार गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत लोग करते हैं। शिकायतों के बावजूद न तो चेयरमेन तथा न ही इ.ओ. इस ओर ध्यान देते हैं। लोग गंदा पानी सेवन करने को बाध्य हैं।

गजरौला पालिका और बिजली वाले निगल गये गरीब को


हैंड पंपों के द्वारा पेयजल उपलब्ध कराने का भी प्रबंध है। नगर पंचायत ने सभी मोहल्लों, कई स्कूलों तथा सार्वजनिक स्थानों पर यहां कई सौ इंडिया मार्का हैंड पंप लगवाये हैं। इनके द्वारा भी शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा। वजह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार के चलते इन हैंड पंपों में पूरी गहराई तक बोरिंग नहीं किया गया। बोरिंग के दौरान कम पाइप डालकर लाखों रुपयों के पाइप बेच कर घोटाले को अंजाम दिया गया है। घोटाले के विशेषज्ञों ने लोगों को प्रदूषित जल पीने को मजबूर कर दिया है। इन नलों के गंदे पानी को स्वच्छ मानकर लोग पी रहे हैं जिससे पेट खराब होने के मरीजों की गजरौला में भरमार है।

गजरौला नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का बोलबाला


शुद्ध पेयजल आपूर्ति के बहाने गत वर्ष तत्कालीन नगर पंचायत ने कई स्थानों पर शुद्ध और शीतल जल मुहैया कराने के लिए कुछ मशीनी प्याऊ लगवायी थीं।

बताया जा रहा है कि एक-एक मशीन लाखों रुपयों की खरीद में दर्ज कर ली गयी जबकि वास्तविक मूल्य उससे काफी कम है। इसका पता इसी से चल जाता है कि सभी मशीनें एक माह भी काम नहीं कर सकीं। उस दौरान न तो उनसे पानी ही मिल सका और न ही शुद्ध जल। जबकि एक माह के बाद तो उन्होंने काम करना बिल्कुल ही बंद कर दिया। ये सभी मशीनें खाली कबाड़ के डिब्बों की शक्ल में सड़कों पर खड़ी खुद पानी मांग रही हैं।

बनते ही टूट रही सड़कें, चेयरमेन मौज में


चेयरमेन हरपाल सिंह और इ.ओ. कामिल पाशा ने जनता के धन को पीने के पानी के बहाने पानी में बहाया है या कहीं और लगाया है? इस सवाल का जवाब लोग चाहते हैं। गरमी मौसम की चौखट पर दस्तक देने वाली है। परंतु नगर पंचायत के चेयरमेन, इ.ओ. तथा सभासद सभी खामोश हैं। लगता है कि वे लोगों की प्यास बुझाने के बहाने फिर से कोई नया धंधा तलाश लेंगे।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम गजरौला.