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मुरादाबाद-बिजनौर एमएलसी सीट : दलित और जाट खामोश हैं

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जाट आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा से वे जाट भी किनारा कर रहे हैं जिन्होंने लोकसभा चुनाव में भाजपा का आंख मूंद कर साथ दिया था। इस समुदाय को सपा और भाजपा दोनों से ही शिकायत है। ऐसे में, हो सकता है, वे मतदान से ही किनारा कर लें। इससे भी सपा को ही लाभ होगा।

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दूसरी ओर बार-बार आरक्षण पर बहस तथा उसकी समीक्षा कर उसमें बदलाव लाने की बात से दलित भी भाजपा से दूरी बनाते जा रहे हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट करके बसपा का सफाया कर दिया था लेकिन वे अब भाजपा के पक्ष में नहीं जाना चाहते, जबकि सपा, उनके लिए पहले ही अछूत है और बसपा का कोई उम्मीदवार ही मैदान में नहीं, ऐसे में उनकी हालत भी जाटों जैसी ही है। मतदान से यह वर्ग भी कन्नी काट सकता है।

बसपा यदि यहां से उम्मीदवार खड़ा करती तो वह सपा के लिए कड़ी चुनौती पैदा कर सकता था। ऐसे में भाजपा के ढीले तेवर सपा उम्मीदवार की जीत का स्वयं ही दावा तैयार कर रहे हैं। फिर भी चुनावी परिणामों से पूर्व कुछ भी नहीं कहा जा सकता।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम अमरोहा.