आने वाले दिनों में भारत की राजनीति आक्रामक, निष्ठुर और अधिक रोमांचक होती जायेगी

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भारत की राजनीति रोचक मोड़ पर पहुंच गयी है। देश विरोधी और देश हित में बात करने वालों की बातें आये दिन की जा रही हैं। यह पता नहीं लग पा रहा है कि देश का विरोध कौन कर रहा है और देश का विरोध करने वाला कोई है भी या नहीं।

राजनीति पशोपेश की स्थिति में नजर आ रही है। पीएम मोदी से जो उम्मीदें देश की जनता ने लगायीं थीं कि विकास होगा और अच्छे दिन का उन्होंने सपना स्वयं लोगों को दिखाया ही था, उसे लेकर जनता के विचार भी बंटे हुए हैं।

किसी को लगता है कि सरकार ने जो कहा था वह उसे पूरा न करने का बहाना खोजती रहती है। उसी खोज के नतीजे सामने आते रहते हैं, जब मुद्दों से लोगों को दूर करने के लिए कभी देशद्रोह और देशभक्त, कभी जेएनयू, कभी कुछ चल निकलता है।

कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें मोदी पर पूरा भरोसा तब से है जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। वे तब से अबतक उनपर विश्वास करते आये हैं। वे कहते हैं कि भारत विकसित हो रहा है। देश की आर्थिक स्थिति सुधर रही है।

असल में उनकी सोच किस तरह बनी है, यह कहना मुश्किल है क्योंकि भारत की अर्थ व्यवस्था उतनी अच्छी नहीं रह गयी है। सेंसेक्स की स्थिति तो किसी से छिपी नहीं है। रुपया लुढ़कने की ओर अग्रसर है।

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मायावती और स्मृति ईरानी : सिर कलम करना और कदमों में डालने पर जंग


मायावती और स्मृति ईरानी का वाकयुद्ध सबसे ज्यादा तेजी से चर्चित होने वाले मसलों में रहा। इससे बिहार के बाद एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का संदेश यह गया कि वे दलित विरोधी हैं। पार्टी की छवि को कई संकटों का सामना करना है। ऐसा बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि भाजपा अपनी छवि सुधारने का प्रयास कर रही है। उसके नेता रोक के बावजूद ऐसा कुछ कर जाते हैं जो उनके ग्राफ को गिरने पर मजबूर कर देता है।

लगता है आने वाले दिनों में भारत की राजनीति आक्रामक, निष्ठुर और अधिक रोमांचक होती जायेगी। जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आती रहेगी, विवाद और मुद्दे विकसित होते रहेंगे।

-हरमिन्दर सिंह.

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