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तहसील नहीं रेलवे लाईन चाहिये : मंत्रियों, सांसदों और विधायकों का उदासीन रवैया

गजरौला-संभल-रेलमार्ग

चिरप्रतिक्षित गजरौला-संभल रेलमार्ग की यहां जनता में एक बार फिर चर्चा है। रेल बजट संसद में रखा जाने वाला है लेकिन सांसद या मंत्री सहित क्षेत्र का कोई भी प्रतिनिधि इस सिलसिले में मुंह खोलने तक को तैयार नहीं है। इस बेहद जरुरी मुद्दे पर मौन नेताओं की मंशा से लोग बहुत खफा हैं। हर बार बजट आने से पूर्व संभल से गजरौला तक की जनता के कान खड़े हो जाते हैं तथा वे इस बात की उम्मीद में बजट की प्रतीक्षा करते हैं कि शायद इस बार रेल लाईन के लिए बजट आवंटित करने की घोषणा हो जाये।

दशकों पूर्व गजरौला-संभल रेलमार्ग का नक्शा तक पास हो गया था। पूरा प्रोजेक्ट तैयार पड़ा है लेकिन किसी भी रेल बजट में इसके लिए धन आवंटित न किया जाने से यह मार्ग निर्माण की बाट जोहता रहा है।

कंवर सिंह तंवर तो सांसद बनने के बाद इधर कभी भूले-भटके पथिक की तरह भले ही आ गये हों। जनहित में उनसे कोई उम्मीद कहीं दिखाई नहीं दे रही। उन्हें रेलमंत्री से कहकर बजट में रेलमार्ग को स्वीकृति दिलाने का प्रयास करना चाहिए था।

संभल क्षेत्र में सपा-भाजपा-बसपा और कांग्रेस कई बड़े दिग्गज मौजूद हैं। भाजपा के मौजूदा सांसद को अमरोहा सांसद को साथ लेकर अपने रेलमंत्री से बात करनी चाहिए। सत्ताधारी पार्टी के सांसद यह काम आसानी से करा सकते हैं। वैसे भी यह काम केन्द्र सरकार का ही है। इसमें राज्य सरकार का बहाना नहीं चलने वाला। यदि इस बार भी यह काम नहीं हुआ तो जनता भाजपा पर भरोसा नहीं करेगी।

गजरौला-अमरोहा-मुरादाबाद और सम्भल का गंगा नदी तक सारा क्षेत्र इस लाइन के बनने से लाभान्वित होगा। लाइन बनने से इलाके की कई समस्यायें सुलझेंगी। यह काम हुआ तो इसका लाभ भाजपा के खाते में जायेगा।

महबूब-कमाल-आब्दी-अशफाक

सपा नेताओं का सनकी मिजाज भी बाधक

प्रदेश की सपा सरकार के क्षेत्रीय प्रतिनिधि भी इधर से उदासीन ही हैं। कई मंत्री और विधायक भी सपा के ही हैं लेकिन वे भी खामोश ही रहे हैं। वे कुर्सी खेल की महारत में ही सारी ताकत लगाने में जुटे हैं। जनसमस्याओं के समाधान के बजाय उनमें इजाफा करने की सनक उन पर हावी रहती है।

मसलन नौगांवा सादात को तहसील बनाने को ही लें तो इस नयी तहसील से लोगों की समस्यायें ही बढ़ेंगी। नौगांवा कस्बे के मुट्ठी भर लोगों को थोड़ी राहत भले ही मिल जाये। इसके बदले दर्जनों गांवों के एक लाख लोगों को इससे यातायात सहित कई नयीं मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। मौलाना आब्दी तथा अशफाक अली खां को बार-बार इस नयी मुसीबत को बुलाने की सनक उठती है। इसी सनक में वे चौथी बार बिन मानक के ही नयी तहसील बनवाने के लिए पूरी ताकत खर्च कर रहे हैं। जबकि जनहित का काम है गजरौला और संभल को सीधे रेलमार्ग द्वारा जोड़ना। अशफाक अली को मौलाना आब्दी का साथ देने के बजाय अपने गांव सिहाली गोसाईं और उसके आसपास के गांवों के बाशिन्दों की भलाई में ताकत लगानी चाहिए।

महबूब अली और कमाल अख्तर दोनों मंत्रियों, मौलाना आब्दी, विधायक अशफाक अली और एम. चन्द्रा और सम्भल के सपा नेता यदि एकजुट होकर रेलमंत्री से बात करें तो यह रेलवे लाइन बनने से कोई नहीं रोक सकता। अध्यात्म और सियासत के टू-इन-वन मॉडल आचार्य प्रमोद कृष्णम भी अपनी अलौकिक ताकत का प्रदर्शन इस शुभ कार्य में करें तो काम आसान हो सकता है।

दायित्व निवर्हन विहीनता के कारण नहीं बना रेलमार्ग

क्षेत्र के मंत्री, सांसद और विधायक, चाहें वे किसी भी दल के रहे हों, सभी ने उपरोक्त जनहितैषी होते हुए काम में कोई रुचि नहीं ली, यदि वे थोड़ा भी प्रयास करते तो यह काम सम्पन्न हो जाता।

हमारे नेताओं की अत्यधिक उदासीनता इस काम में सबसे बड़ा कारण है। नेता थोड़ा आगे आयें तो जनता उनके पीछे-पीछे चल पड़ेगी। नेता मुखर हों तो काम अब भी हो सकता है। वैसे भी रेलमंत्री की भारतीय रेल तो प्रभु कृपा के सहारे ही है।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम गजरौला.