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दीपेन्द्र की हत्या के सबूत घटनास्थल पर हैं, पुलिस जानबूझकर आत्महत्या ठहराने के प्रयास में

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जिस अवस्था में छात्र का शव मिला है। उसे देखकर हत्या होने का पुख्ता विश्वास किया जाने में संदेह नहीं। दीपेन्द्र की हत्या हुई है। यह अभी भले ही पता न चला हो कि हत्यारा कौन है? इसी के साथ यह भी स्पष्ट है कि हत्या की साजिश रचने वाला स्कूल का ही कोई व्यक्ति है। यह अलग बात है कि उसमें स्कूल से बाहर के भी किसी व्यक्ति का हाथ हो। यह हो ही नहीं सकता कि स्कूल में एक जवान छात्र की हत्या कर दी जाये और स्टाफ या छात्रों में से घटना का किसी को भी पता न चले।

प्रबंधक, प्रधानाचार्य, वार्डन, रात में हॉस्टल में रहने वाले छात्र और स्कूल कर्मचारियों से अलग-अलग सवाल पूछे जायें तो इस हत्या के रहस्य का पर्दाफाश हो जायेगा। क्राइम ब्रांच अथवा थाना पुलिस के लिए यह बड़ी बात नहीं।

बाहर को खिड़की खुली होना, मृतक के शरीर पर कई जगह चोटों के निशान तथा खून से सना शरीर और गले के बजाय, मुंह पर फंदा लगा होना, ऐसे प्रमाण हैं जो स्वतः बोल रहे हैं कि मारपीट में छात्र की मौत हुई होगी, जिसे आत्महत्या का रुप देने के लिए हत्यारों ने शव को फांसी पर लटकाने का तरीका निकाला और अंदर से कुन्डी बंद कर वे बाहर को खिड़की से उतरे हों।

यह भले ही हो कि हत्यारे बाहर से आये हों लेकिन इसमें कारण तो अंदर का ही है और अंदर के सहयोग से ही बाहर का आदमी बुलाया गया होगा। पुलिस चाहे तो मामला आसानी से खुल सकता है।

क्या पता पुलिस को पता भी हो लेकिन वह स्कूल संचालकों से हमसाज हो? इसलिए इसे दूसरा रुप यानि आत्महत्या ठहराने की कोशिश की जा रही है।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम गजरौला.