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'माताओं को स्तनपान का महत्व समझाएं डॉक्टर'

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मां का दूध केवल पोषण ही नहीं, जीवन की धारा है। इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अतः सभी डाक्टरों का परम कर्तव्य है कि गर्भवती महिलाओं तथा नयी माताओं को स्तनपान के महत्व को समझाकर तथा उनकी अनेकों प्रकार की धारणाओं एवं शंकाओं को दूर कर उन्हें स्तनपान (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) कराने के लिए प्रेरित करें।

उक्त विचार न्यूट्रीशन इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली की ओर से बाईपास मार्ग स्थित डा.सत्येन्द्र रिसॉर्ट में डाक्टरों के लिए आयोजित एक सभा में जिंदल हॉस्पिटल की बालरोग विशेषज्ञा डा.राधा जिंदल ने मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए व्यक्त किये।

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डा.राधा जिंदल ने डाक्टरों को बताया कि शिशु को पहले छह महीने तक केवल स्तनपान पर ही निर्भर रखना चाहिए। यह शिशु के जीवन के लिए बहुत जरूरी है। इस बात से आज के दौर में अधिकतर महिलाएं अनभिज्ञ रहती हैं। बच्चे के जन्म के बाद महिलाएं कहती हैं कि उनको बच्चे को पिलाने के लिए दूध नहीं हो रहा है एवं आसपास के लोग शिशु को डिब्बे का दूध पिलाने की सलाह दे डालते हैं।

माँ के दूध की प्रशंसा करते हुए डा.राधा ने कहा कि मां का दूध सुपाच्य होता है और इससे पेट की गड़बड़ियों की आशंका नहीं होती। मां का दूध शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है। कुछ शिशुओं को गाय के दूध से एलर्जी हो सकती है। इसके विपरीत मां का दूध शत-प्रतिशत सुरक्षित है।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नये शोध से प्रमाणित हुआ है कि स्तनपान करनेवाले बच्चे बाद में मोटे नहीं होते। यह शायद इस वजह से होता है कि उन्हें शुरू से ही जरूरत से अधिक खाने की आदत नहीं पड़ती। स्तनपान से जीवन के बाद के चरणों में रक्त कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। स्तनपान से शिशु की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है। इसका कारण यह है कि स्तनपान करानेवाली मां और उसके शिशु के बीच भावनात्मक रिश्ता बहुत मजबूत होता है।

उन्होंने बताया कि नयी माताओं द्वारा स्तनपान कराने से उन्हें गर्भावस्था के बाद होनेवाली शिकायतों से मुक्ति मिल जाती है। इससे तनाव कम होता है और प्रसव के बाद होनेवाले रक्तस्राव पर नियंत्रण पाया जा सकता है। स्तनपान करानेवाली माताओं को स्तन या गर्भाशय के कैंसर का खतरा न्यूनतम होता है।

डा.जिंदल ने जानकारी दी कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के सर्वेक्षण के अनुसार, शुरुआती छह माह तक  केवल स्तनपान कराने वाली माताओं की संख्या महज 21 प्रतिशत है जबकि 79 प्रतिशत मांओं ने छह माह की उम्र में बच्चों को पूरक दुग्धपान शुरू करवा दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह है कि बच्चों को उनके पहले छह महीनों में सिर्फ माँ का दूध दिया जाए। वे यह भी कहते हैं कि ठोस आहार शुरू करने के बाद भी शिशु के पहले साल के अंत तक स्तनपान जारी रखना चाहिए।

एक दिलचस्प शोध का हवाला देते हुए डा.राधा ने बताया कि मां का दूध न सिर्फ मां और बच्चे के लिए बेहतर होता है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ता है। यह जानकारी एक शोध से सामने आई है। ब्राजील के पेलोटा की फेडरल विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सेसर विक्टोरिया ने अपने शोध पत्र में बताया कि स्तनपान को बढ़ावा देना विकसित और गरीब दोनों ही तरह के देशों के लिए फायदेमंद है। यह शोध लेसेंट पत्रिका की एक सीरीज में प्रकाशित किया गया है। इसमें कहा गया है जो बच्चे मां का दूध पीते हैं वे आगे जाकर पढ़ाई में अच्छे होते हैं, उनकी दीर्घकालिक आय बेहतर होती है, उनकी उत्पादक क्षमता में वृद्धि होती है।

सरकारी प्रयासों के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि विभिन्न कारणों के चलते मांओं द्वारा अपने नवजात बच्चों को जल्दी ही स्तनपान से दूर किए जाने के इस दौर में सरकार ने नवजात और छोटे बच्चों को स्तनपान करवाने की एक राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करने का फैसला किया है। इस योजना में स्तनपान को बढ़ावा दिए जाने के लिए सलाह और सार्वजनिक स्थानों पर इसके लिए अलग जगह बनाने जैसे कदम शामिल हैं। नवजात एवं शिशु स्तनपान पर बनी राष्ट्रीय परिचालन समिति की हालिया बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने योजना का मसौदा तैयार करने के लिए विभिन्न संगठनों, विभागों और मंत्रालयों से सुझाव मंगवाए हैं।

प्रदेश सरकार के प्रयासों के बारे में जानकारी देते हुए डा.जिंदल ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार भी जल्द ही राजधानी में मानव दुग्ध बैंक खोलने जा रही है। इस दूध का इस्तेमाल माँ के दूध से वंचित नवजातों को बचाने के लिए किया जाएगा। प्रदेश में नवजात बच्चों की मृत्यु दर बहुत अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि पांच साल से कम उम्र के 13 फीसद बच्चों की मृत्यु स्तनपान से रोकी जा सकती है। यह बैंक माँ के दूध की प्रतिपूर्ति कर ऐसे बच्चों की मृत्यु दर घटाने का प्रयास करेगा। प्रदेश में इस तरह का यह पहला प्रयास है। जो कि कई जिलों में जन्म के तत्काल बाद नवजातों को माँ के दूध की पूर्ति करेगा। इसकी मुख्य इकाई लखनऊ में रहेगी जो आपूर्ति की श्रृंखला तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के बैंक राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में पहले से ही सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया की जिंदल हॉस्पिटल भी स्तनपान को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयासरत है। जिसमें प्रत्येक वर्ष वर्ल्ड एलाइंस फॉर ब्रेस्टफीडिंग एक्शन, मलेशिया के साथ मिलकर विश्व स्तनपान सप्ताह का आयोजन, नयी माताओं को स्तनपान कराने की ट्रेनिंग, चिकित्सकीय सलाह आदि शामिल हैं।

इस अवसर पर डा.ज़फर इकबाल, डा.बी.एस. जिंदल, डा.एम.पी.शर्मा, डा.हाजी याकूब अली, डा.आदित्य, डा.इस्माइल सैफी, डा.रामनाथ आर्य, डा.शराफत अली, डा. हितेश गर्ग, डा. नवाब अली, डा.शौकत अली, डा. दिलबाग जिंदल आदि उपस्थित थे। 

 -गजरौला टाइम्स डॉट कॉम मंडी धनौरा.