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मौलाना की सनक के आगे लाचार जिला प्रशासन और सरकार, बिना ब्लॉक के तहसील बनाने को तैयार

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लगता है विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के चेयरमेन मौलाना जावेद आब्दी ने अपने क्षेत्र के लोगों को परेशान करने की कसम खा ली है। नौगांवा सादात को जिस तरह से तहसील बनाने का फैसला लिया जा रहा है, उससे इस तहसील में शामिल किये जाने वाले गांवों के लोगों के सामने आर्थिक और मानसिक परेशानियों का पहाड़ खड़ा हो जायेगा। सबसे मजेदार बात यह होने वाली है कि नौगांवा सादात नगर पंचायत के जो लोग नयी तहसील बनने का सपना देख रहे हैं, सबसे अधिक परेशानी उन्हीं के पल्ले बंधनी है। उनका एक पैर नौगांवा और दूसरा पैर अमरोहा में होगा।

जिस तहसील मुख्यालय के लिए चार साल से कोशिश की जा रही है, पहले तो उसके बनने में ही अभी कई अवरोध हैं। फिर भी यहां के सपा नेता और उनके बेहद स्वामिभक्त अधिकारी जब नेशनल हाइवे को नियम कानून खूंटी पर टांग कर घंटों तक सट्टेबाजों के लिए आरक्षित कर उस पर तांगा दौड़ करा सकते हैं, तो तिकड़म के सहारे वे नौगांवा को तहसील क्या कुछ भी बनवा सकते हैं। भले ही वकील या समझदार लोग इसका कितना ही विरोध करें।

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जो प्रस्ताव डीएम वेदप्रकाश ने तैयार कराया है उसके मुताबिक इस नयी तहसील में केवल 164 गांव होंगे। इनमें 138 अमरोहा तथा 26 गांव धनौरा तहसील से लिए गये हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि इन गांवों के ब्लॉक कार्यालय उनकी तहसील से बाहर होंगे। यह शायद देश की पहली ऐसी तहसील होगी, जिनमें एक भी ब्लॉक नहीं होगा।

होता यह है कि बड़ा कार्यालय दूर तथा छोटा कार्यालय निकट होता है। लेकिन नौगांवा के लोग ब्लॉक के काम से अमरोहा जायेंगे और तहसील के काम से अपने शहर में। एक काम के लिए उन्हें दो-दो जगह सिर पटकना पड़ेगा। नयी तहसील न बनने से उनके जिला, तहसील, और ब्लॉक स्तरीय काम अमरोहा जाने पर ही सम्पन्न हो जाते थे।

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तहसील में शामिल कुछ गांवों को जोया ब्लॉक से भी जोड़ा गया है। इन गांवों के लोगों से तो लगता है मौलाना ने कोई पुरानी दुश्मनी निकालने की ठान ली है।

स्थानीय लोग जानते हैं कि ब्लॉक के काम के लिए जोया, तहसील के लिए जोया से अमरोहा और वहां से नौगांवा जाना होगा। एक मामूली कागज के लिए पूरा जनपद छानना पड़ेगा।

यदि नौगांवा में ब्लॉक कार्यालय होता तो वहीं सारा काम एक साथ हो जाता। इसीलिए सबसे पहले ब्लॉक, फिर तहसील और बाद में जिला बनाया जाता है। जरुरत पर उसी क्रम में कमिश्नरी या उससे भी आगे तक जाने का सिस्टम है।

ये मौलाना, पंडे और पुजारी राजनीति में घुसकर देश का सत्यानाश करने पर तुले हैं। हमारे नेता हैं कि आंख मूंदकर उनके पीछे चल पड़ते हैं।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम अमरोहा.