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MLC ELECTION RESULT UP : अच्छे दिन लाने वालों के बुरे दिन का आगाज? सबसे बड़ी पार्टी सिमट गयी जीरो पर

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उत्तर प्रदेश के विधान परिषद चुनाव के ताजा परिणामों से तो ऐसा लगता है कि यहां जनमत भाजपा के पूरी तरह खिलाफ है। 28 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा का बिल्कुल सफाया होना इस कथन का सबसे ठोस प्रमाण है। लोकसभा चुनावों से इस समय बिल्कुल उल्टी स्थिति यहां हो गयी है जब उसे 73 सीटों पर सफलता मिली थी। जबकि आज वह 28 में से एक अदद एमएलसी के लिए भी तरस गयी। बसपा और कांग्रेस भी कहने के लिए आज सूबे में भाजपा से बेहतर स्थिति में हैं।

एमएलसी चुनावों में 28 सीटों पर सपा को 23, कांग्रेस को एक, बसपा को दो और निर्दलीय को एक सीट पर जीत मिली।

समाजवादी पार्टी ने कुल 36 में से 31 सीटों पर अपना कब्ज़ा जमाया है। एमएलसी की स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र से कुल 36 सीटें खाली थीं। 8 सीटों पर सपा के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए और मतदान 28 सीटों पर हुआ था।

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बल्कि प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र में बसपा ने नीला झंडा जिताकर सभी को हैरत में डाल दिया है। बनारस से जीतने का मतलब है दलित और अल्पसंख्यक यहां भाजपा और सपा दोनों सरकारों के खिलाफ हैं। काशी जिसने लोकसभा चुनाव में भारी मतों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लोकसभा में भेजा था, दो वर्ष से कम समय में ही उस काशी को पीएम में ऐसा क्या खोट नजर आया कि भाजपा यहां तीसरे यानि सबसे निचले पायदान पर पटक दी गयी?

मजेदार बात यह है कि इधर उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि सबसे अधिक मतदाताओं के राज्य में वह जीरो पर पहुंच गयी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह उधर असम राज्य के चुनाव प्रचार में कह रहे हैं कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है। अमित शाह की पार्टी सदस्यों की संख्या तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बताई गयी थी। उस झूठ का पर्दाफाश एमएलसी चुनाव में हो गया। क्या भाजपा कार्यकर्ता सपा के पाले में चले गये? या तो भाजपा के कार्यकर्ताओं की संख्या में झूठ बोला गया या उनके सदस्य अब उन्हें छोड़कर विरोधी खेमों में चले गये। जो भी हो, उत्तर प्रदेश में तो भाजपा के अच्छे दिन आये नहीं, और बुरे दिन आने का प्रमाण एमएलसी चुनाव के नतीजे दे चुके।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम अमरोहा.