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नेता नहीं जनता को दें ट्रेनिंग

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नेताओं को ट्रेनिंग चाहिये ताकि अच्छी नेतागीरी की जा सके। सोचता हूं कि काश मैं नेता होता। जनता का सपोर्ट मिलता और संसद में बैठता। मौज रहती। मेरी मुस्कराहट भी सदानंद गौड़ा जैसी हो जाती।

जब से पड़ोस के गोलू को पता चला है कि नेताओं को ट्रेनिंग दी जा रही है। वह उतावला हुआ जा रहा है। उसने बड़े होकर नेता बनने की ठान ली है। वह ठाठ के बारे में सुनता है तो उछल पड़ता है। ट्रेनिंग के दौरान नेता जो भी सीखे उनका समय मस्ती में कटेगा- ऐसा गोलू ने अंदेशा जताया। खायेंगे-पियेंगे और आराम फरमायेंगे। क्या चाहिये जीवन से, सुख और शांति।

जनता को ट्रेनिंग के लिये साधारण होटल में प्रबंध करवाइये ताकि वे सही लोगों को संसद तक पहुंचा सकें। उन्हें एसी नहीं चाहिये, न फाइव स्टार का सुख, न बंद पानी की बोतल, न महंगा भोजन। उनकी इच्छा नेताओं की तरह नहीं जिनका पेट जिंदगी भर नहीं भरता, चस्का जो लग जाता है। जनता को तो आम सुविधायें चाहिये। उसकी तरक्की अपने आप हो जायेगी।

जनता के प्रशिक्षण से नेताओं को खतरा है। वे समझदार हो जायेंगे। सवाल उठायेंगे। अच्छे-बुरे का ज्ञान हो जायेगा। नेताओं को जवाब देते नहीं बनेगा। उनकी पोल खुलती जायेंगी। शायद भ्रष्टाचारियों को अपने सफेद कुर्ते उतारकर भी भागना पड़े। एक बात जरूर होगी देश की सूरत बदल जायेगी।

हम चाहते हैं कि प्रशिक्षण जनता को दिया जाना चाहिये। फिर नेताओं को सिखाने की जरूरत नहीं!

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम के लिए मोहित सिंह.