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जहां समाजवादी पार्टी के नेता सपा सरकार के चार वर्ष पूरे होने के जश्न मनाने में लग गये हैं और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा सपा के वरिष्ठ नेता विधानसभा चुनाव को निकट जान चार वर्षों के काम का प्रचार करने को कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रहे, वहीं उत्तर प्रदेश की जनता इस शासन से निजात चाहने को बेताब है। लोग किसी तरह इस पार्टी से छुटकारा चाहते हैं।

हम यह यूं ही नहीं कह रहे बल्कि जनता के बीच रहकर आम आदमी का जीवन जीने वाला सबसे बड़ी आबादी वाले सूबे का हर व्यक्ति सरकारी बेरुखी, हठधर्मिता, बढ़ती घूसखोरी, पुलिस प्रशासन के अन्याय और पंगु हो चुकी तमाम व्यवस्था के कारण बहुत परेशान है। ऐसे में जब सूबे की सरकार का मुखिया और उसके तमाम मंत्री, विधायक तथा संगठनों के पदाधिकारी अपने मुंह अपनी प्रशंसा करते हुए विकास के थोथे आंकड़े लोगों के सामने प्रकट करते हैं, तो पहले से अपने दर्द को दबाये बैठी जनता के घाव हरे हो उठते हैं।

सूबे की आर्थिक रीढ़ कहा जाने वाला किसान सरकार और मिल मालिकों की सांठगांठ का शिकार होकर गत वर्ष बेचे गन्ने के पैसों के लिए मारा-मारा फिर रहा है। उसे उसका मूल भी नहीं मिलता और बैंक एक-एक पैसे पर ब्याज दर ब्याज लगाती जा रही है। बिजली बिलों के लिए तारीख रखकर अल्टीमेटम दिया जा रहा है।

ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर तक जहां भी किसान का काम पड़ता है, दलाल और बिचौलियों के बिना काम नहीं होता। न्याय की गुहार को चीखने वालों को सरकारी काम में बाधा कि धमकी देकर चुप करा दिया जाता है।

सड़कों, नालियों और आवास रहित लोगों के लिए मकान आदि तो बनवाये जा रहे हैं। सरकारी खजाने से पैसा भी खर्च हो रहा है, लेकिन नेता, ठेकेदार और भ्रष्ट कर्मचारी मिलकर क्या कर रहे हैं? कोई देखने वाला न सुनना वाला। शिकायत पर जांचकर्ता आते हैं और स्याह को सफेद कर चले जाते हैं। यह है समाजवादी विकास का सच।

-जी.एस. चाहल.