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कन्हैया, मोदी और गाल बजाने वाला सोशल मीडिया

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कन्हैया को लेकर बवाल समय-समय पर उबाले लेता रहता है। ऐसा लगता है जैसे किसी ने छौंक लगा दिया हो, जिसमें मिर्ची ज्यादा हो गयी हो, और वह अपने आसपास के हिस्से को लपेटे में ले रहा हो। लगातार छींकते लोगों और उनके बाद उत्पन्न हबड़तबड़ के कारण माहौल चौंकाने वाला बन पड़ा हो।

विरोधियों को कन्हैया से उस समय से भारी चिढ़ है जबसे यह जेएनयू का अदना-सा छात्र कथित तौर पर देशद्रोही साबित होता रहा। उसके दूसरे साथी भी उसी श्रेणी में शामिल किये जाते रहे। उसके बाद उसे जेल में डाल दिया गया। बाद में वह बाहर आया। तबतक वह हीरो बन चुका था।

कन्हैया को चर्चित करने के पीछे उसके विरोधियों का सबसे बड़ा हाथ साबित हुआ। वे ही थे जो हर सेकण्ड उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे थे।

सोशल मीडिया की एक खासियत होती है कि वहां वायरल होते देर नहीं लगती। अच्छा या बुरा साबित होने से कुछ नहीं होता, चर्चा मिलना तय है।

जब कन्हैया ने गला दबाने की बात कही तो उसे चर्चा मिलनी स्वभाविक थी। उसके पीछे भी विरोध करने वाले अपने-अपने हथियारों को लेकर मैदान में कूद पड़े। उनके साथ पिछली बार की तरह इस बार दूसरे वे भी खिसाये हुए लोग शामिल थे जिन्हें लगता था कि कन्हैया आयेगा तो उनकी मार्केट वैल्यू डाउन हो जायेगी। वे निहत्थे नहीं थे। उनके पास उनकी अपनी कमान थी जिसमें शब्द-बाण थे जो उनके अनुसार सीधे कन्हैया को वेध डालेंगे।

नकली दुनिया में सबकुछ नकली होता है।

उधर अरविन्द केजरीवाल पर तो गालियों की बौछार उस दिन से पड़नी शुरु हो गयी थी जब वे पहली बार पीएम मोदी के खिलाफ खुलकर सामने आये थे। मोदी समर्थकों ने उन्हें आड़े हाथों लिया। ऐसे लोगों का सबसे बड़ा सहारा सोशल मीडिया बना जहां चिल्लाने बैठो तो न दिन का पता चले, न रात का।

केजरीवाल से ध्यान हटाकर कुछ लोग जिनके एक नहीं कई फर्जी अकाउंट हो सकते थे, उन्होंने कन्हैया को पकड़ लिया। उन्हें लगा कि आभासी दुनिया में एक आदमी को कोसते-नोचते-गलियाते बोरियत महसूस हो गयी है। इसलिए उन्हें वैरायटी चाहिए थी।

वैसे राहुल गांधी के पर्दे से कुछ समय के लिए गायब हो जाने के बाद अपने दिमाग की ताकत को सोशल मीडिया के बेरोजगार कमेरों की लाइन में खड़े होकर इस्तेमाल करने वालों को कन्हैया मिल गया है। वे लंबे समय तक अपनी ऊर्जा का व्यय यहां करते रहेंगे।

गाल बजाने और महिमामंडन करने की प्रक्रिया में भी उनकी भागीदारी लगातार चलती रहेगी।

-हरमिंदर सिंह.