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कानूनी शिकंजे में तथाकथित भगवान

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धर्म के ठेकेदारों ने देशभर में अवैध कब्जे करके जो दुकानें खोल रखी हैं, उन्हें हटवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। उसने अपने पिछले आदेश पर अमल न करने वाले राज्यों की सरकारों को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया है कि क्या अदालतों के आदेश कोल्ड स्टोरेज में डालने के लिए होते हैं। जस्टिस वी. गोपाल गौड़ा और जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने राज्य सरकारों से इन ढांचों को तोड़ने के लिए कहा है।

यह कटु सत्य है कि देशभर में धर्म के नाम पर सड़कों तथा फुटपाथ की भूमि, पंचायतों तथा सरकारी और सार्वजनिक स्थानों की भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया हुआ है। जिनमें से कई विवादित स्थानों पर झगड़े तथा बवाल होते हैं और ऐेसे मामले लंबे समय से अदालतों में लंबित हैं। इस अतिक्रमण से सड़कों की जगह तंग हुई है। फुटपाथों पर चलने में अवरोध होता है। ये तथाकथित भगवान के घर वास्तविक इंसानों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गये हैं।

जो आंकड़े उपलब्ध हैं उनके अनुसार देश के बहुत छोटे से राज्य तमिलनाडु में सबसे अधिक कुल 77450 अवैध धर्म स्थल हैं जबकि सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का चौथा स्थान, अर्थात यहां 45 हजार अवैध स्थनों पर धर्मस्थल प्रकाश में आये हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश तमिलनाडु के बाद क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर है। महाराष्ट्र और गुजरात की स्थिति भी इनसे मिलती जुलती है। देश के बाकी राज्यों में दो तीन को छोड़कर इक्का दुक्का स्थानों पर ही ऐसा है।

उत्तर प्रदेश में हमने देखा है कि नेशनल हाइवे से लेकर स्टेट हाइवे तक सड़कों के दोनों ओर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कोई न कोई देवी-देवता या मजार के नाम से इस तरह के धर्मस्थल बने हुए हैं। कहीं-कहीं ये मामूली स्तर के हैं तो कहीं विशाल आकार ले चुके हैं। इनमें से अधिकांश सड़कों की भूमि पर अवैध कब्जे कर बना लिये गये हैं। साथ ही इनके संचालक इनसे जुड़ी मनघडंत कहानियों का प्रचार कर उन्हें महिमामंडित करते रहते हैं। धार्मिक त्योहारों पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन धर्मान्ध लोगों को इनकी ओर अधिक आकर्षित करता है।

वैसे तो दुनियाभर में धर्मान्ध लोगों की कमी नहीं लेकिन हमारे यहां यह कुछ ज्यादा ही है। यही कारण है कि राह चलते लोग रुक रुककर इन अवैध स्थलों पर नाक रगड़ते हैं और आर्थिक सहयोग भी दिल खोलकर करते हैं। ड्राइवरों में इनके प्रति सबसे अधिक अंधश्रद्धा देखने में आयी है।

बिना श्रम किये अथवा नाम मात्र के प्रयास से चालू यह धंधा कई कम पढ़े लिखे तथा रुढ़िवादी लोग शुरु करते हैं तथा धीरे-धीरे बहुत से लोग जिनमें महिलायें अधिक होती हैं यहां अपनी समस्याओं के लिए आना शुरु कर देती हैं। कुछ बेरोजगारों को यह धंधा अच्छा रोजगार का साधन सिद्ध हो रहा है जबकि गैरकानूनी कब्जा कर सार्वजनिक संपत्तियों को हथियाने का यह धंधा सड़क मार्गों को संकुचित तथा यातायात में अवरोध खड़ा कर रहा है।

कई स्थानों पर तो पहले एक पत्थर रखकर उसपर फूल और जल चढ़ाकर काम चालू कर दिया गया। बाद में जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया अनेकों उन भगवानों को बनाकर खड़ा कर दिया जाता है, जिनके लिए संत कबीर ने कहा था -लोगन राम खिलौना जाना।

चंद लोगों द्वारा आजीविका को अवैध स्थलों पर निर्मित इन कथित भगवानों के घरों को अदालती आदेश के बाद तो हटवा ही देना चाहिए। इनमें विरोध करने वालों के खिलाफ उसी तरह कार्रवाई करनी चाहिए जैसे राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधराराजे सिंधिया ने जयपुर में सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे धर्मस्थलों को तोड़ कर की थी।

देश हित और जनहित का यह काम किसी भी तरह धर्म विरुद्ध नहीं है। क्योंकि धर्म न्यायसंगत परंपराओं का पक्षधर है। गैरकानूनी तथा दूसरे की संपत्ति पर अधिकार करना भला धार्मिक कैसे हो सकता है?

-जी.एस. चाहल.