Header Ads

सलमान आयेंगे-जायेंगे, लेकिन मिल्खा, मैरी कॉम जैसे खिलाड़ी एक बार ही पैदा होते हैं

salman-khan-milkha-singh

सलमान खान बेवजह का मुद्दा बन जाता है और वजह का भी। इंडियन ओलंपिक एसोसियेशन को लगा कि सलमान में वह जादू है जिसकी वजह से भारत ओलंपिक में उत्साहित होकर खेल सकता है, तो उसने एक अभिनेता को खेलों का गुडविल एंबेसडर बना दिया।

लेकिन दूसरी तरफ सलमान खान की आलोचना शुरु हुई जिसका सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। कहा जा रहा है कि सलमान ने खेलों के लिए किया क्या है?

तर्क देने वालों का कहना है कि सलमान खान अभिनय करते हैं। उनका खेलों से नाता कैसे हो सकता है?

ओलंपिक एसोसियेशन पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं कि उन्हें मिल्खा सिंह नहीं दिखायी दिये। योगेश्वर दत्त और मेरी कॉम जैसे खिलाड़ी दिखने से पहले क्या आइओए की आंखों पर पट्टी बंधी थी।

ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने खेल के लिए खुद को समर्पित किया है। ये वे लोग हैं जिन्होंने खेल को जिया है, उसे अपनी रगों में बसाया और दूसरों को प्रेरणा दे रहे हैं। उनपर फिल्में यूं ही नहीं बनायी गयीं। उनकी कहानी को दूसरों तक पहुंचाना जरुरी था।

ओलंपिक संघ का अपना मत है कि इससे खेलों को ज्यादा प्रचार मिलता है। लेकिन संघ भूल जाता है कि खेलों पर फिल्में बनती हैं, तो सलमान जैसे कलाकार दूसरों की जिंदगी जीते हैं। मिल्खा सिंह और मैरी कॉम पर बनी फिल्में अभिनेता नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के संघर्षपूर्ण जीवन के कारण सफल साबित हुई हैं।

देश में सलमान आते-जाते रहेंगे, लेकिन मिल्खा सिंह, मैरी कॉम जैसे खिलाड़ी एक बार ही पैदा होते हैं।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम के लिए अमित कुमार.