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UP ELECTION 2017 : चुनावी सर्वे के बाद भाजपा और सपा के निशाने पर बसपा

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विधानसभा चुनावों की तैयारी में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की तैयारी दूसरे सभी दलों से आगे है। जब से कुछ सर्वेक्षणों में बसपा की हालत सबसे बेहतर बतायी गयी है और भाजपा को दूसरे तथा सपा को तीसरे स्थान पर दिखाया गया है, तब से समाजवादी पार्टी ने अपनी किलेबंदी को मजबूत करने की रणनीति पर गंभीरता दिखायी है। इसी के साथ बसपा नेता उत्साह से लबरेज हो तैयारियों में अभी से जुट गये हैं।

उधर दोनों बड़े राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस दूसरे राज्यों के चुनावी अभियान में संलग्न होने के कारण अभी उत्तर प्रदेश को प्रमुखता से नहीं ले रहे। इसी के साथ भाजपा की भगवा टोली के कई चेहरे जिसमें संघ का शीर्ष नेतृत्व भी शामिल है, लखनऊ की सत्ता तक पहुंचने के हथकंडों के अन्वेषण में जुट गये हैं। कांग्रेस के बड़े नेता भले ही असम, बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव तथा उत्तराखंड की उठकपटक में लगे हों लेकिन उन्होंने चुनाव विशेषज्ञ को यूपी चुनाव की कमान सौंप कर रणनीति शुरु कर दी है।

उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है जिसके विधानसभा में सबसे अधिक सदस्य हैं। ऐसे में इस राज्य का चुनाव दूसरे सभी राज्यों से महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश के बल पर ही आज भाजपा बहुमत के साथ केन्द्र की सत्ता में है। जिस राज्य से उनके 73 एमपी हैं, यदि विधानसभा के चुनाव में वह पराजित हो गयी तो आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के लिए यह खतरे की घंटी होगा।

वैसे भाजपा की उल्टी गिनती दिल्ली विधानसभा चुनावों से ही शुरु हो गयी थी। जहां सारी लोकसभा सीटें जीतने के बाद विधानसभा चुनाव में उसका लगभग सफाया ही हो गया। उसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव में भी लोकसभा चुनाव के नतीजों के विपरीत उसे भयंकर पराजय का सामना करना पड़ा।

चुनाव पूर्व सर्वे के नतीजों पर भरोसा करें तो भाजपा की जो उल्टी गिनती दिल्ली से शुरु हुई है, वह बिहार और उससे आगे उत्तर प्रदेश तक जारी रहने के स्पष्ट संकेत दे रही है। फिर भी उसे यह संतोष होना चाहिए कि कांग्रेस की हालत यहां बद से बदतर बतायी जा रही है।

भाजपा यह अच्छी तरह समझ गयी है कि अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय अभी भी उससे संतुष्ट नहीं है। हालांकि इस वर्ग को लुभाने में वह कोई कसर नहीं छोड़ रही। ऐसे में उसका निशाना दलित तथा पिछड़ा वर्ग मतदाताओं पर है। इसके लिए वह पहले दलित वोटों को लुभाने के लिए डा. अम्बेडकर की भक्त बनना शुरु हो गयी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत भाजपा के सभी नेताओं को अब डा. भीमराव अंबेडकर से बड़ा महापुरुष कोई नहीं लग रहा। यदि डा.अंबेडकर कहीं उन्हें मिल जायें तो भाजपा और उसकी भगवा टोली उनके चरणों में बार—बार दंडवत करते नहीं थकेगी। उत्तर प्रदेश के चुनाव तक इस भगवा मंडली के नायक सावरकर और दीनदयाल उपाध्याय के बजाय बाबा साहेब ही रहेंगे।

बसपा, भाजपा की इस फितरत से परिचित है। उसने अपने इस परांपरागत वोट बैंक को संभाल कर रखने की तैयारी शुरु कर दी है। लोकसभा चुनाव में भाजपा की झोली में इस वर्ग का काफी वोट बैंक चला गया था, वह वापस इधर मुड़ा है। अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग जिसने सपा को पिछले चुनाव में सत्ता सौंपी थी, वह भी बड़ी संख्या में उधर से बसपा की ओर आना शुरु हो गया है। ताजा सर्वे हमारे अनुमान को ठीक सिद्ध करते हैं।

अभी मतदान में एक वर्ष है। ऐसे में बसपा के सामने सूबे के मतदाताओं पर भरोसा कायम रखने के साथ उसमें इजाफा करने की  कोशिश बरकरार रखते हुए अभियान जारी रखना होगा। थोड़ी भी ढील परिणाम बदल सकती है। सपा चुनाव पूर्व सर्वे के परिणामों को गलत सिद्ध करने के लिए एड़ी चोटी से कुर्सी बचाये रखने के प्रयास में जुट गयी है। अब भाजपा और सपा दोनों का निशाना बसपा के वोट बैंक पर रहेगा।

-जी.एस. चाहल.