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ए.एस.पी. के मजदूर शोषण के खिलाफ हिंसा को मजबूर

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ए.एस.पी. कंपनी में शोषण के खिलाफ मजदूरों ने मोर्चा खोल दिया है। शोषण के शिकार मजदूरों की एक सभा में मजदूर नेताओं ने एलान किया कि उनके हकों पर कुठाराघात करने वाले कंपनी प्रबंधकों ने उन्हें न्याय नहीं दिया तो वे मजबूर होकर हिंसा का रास्ता चुनेंगे जिसका दायित्व प्रबंधतंत्र पर होगा।

अपनी समस्याओं को लेकर एएसपी कर्मचारी और मजदूर यहां ललिता देवी मंदिर के सामने एकत्र हुए और सभा की। सभा को संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियन नेता वीरेन्द्र सिंह सिरोही ने प्रबंधन पर आरोप लगाया कि कंपनी एक सुनियोजित षड़यंत्र के तहत कर्मचारियों को नियमित नहीं कर रही। आठ वर्षों से सेवारत कर्मचारियों को भी नियमित नहीं किया गया। जिससे वे वेतनावृद्धि तथा कई अन्य वाजिब कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। औद्योगिक क्षेत्र में सेवारत दूसरी सभी इकाईयों से कम वेतन और सुविधायें यहां दी जाती हैं। यह कर्मचारियों के साथ सरासर अन्याय है।


अधिकांश वक्ताओं ने श्रमिक हितों के लिए सरकार द्वारा नियत किये श्रम विभाग और श्रम-न्यायालयों की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा किया। उपश्रमायुक्त न्यायालय के जरिये भी उन्हें राहत नहीं मिलती। मामूली वाद वर्षों तक घिसटते हैं तथा कोई फैसला ही नहीं होता। गरीब और बेसहारा मजदूर लंबी लड़ाई की ताकत नहीं रखता। यही कंपनी चाहती है। इसलिए मजदूरों के हितों के लिए बनाये इस तरह के विभागों से भी मजदूरों को कोई लाभ नहीं मिलता।

अपने हितों की मांग कर रहे छह कर्मचारियों को कंपनी ने बाहर कर दिया था। सभा में इन सभी मजदूरों को तुरंत काम पर वापस लेने की मांग की गयी। भीषण गर्मी की परवाह किये बिना सभी मजदूरों ने घंटों सभा स्थल पर जमे रहकर कंपनी प्रबंधन को सीधे रास्ते पर आने की चेतावनी दी। साथ ही घोषणा की कि यदि सीधी अंगुली से घी नहीं निकला तो वे हिंसक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

सभा में सतेन्द्र यादव, संजय यादव, सुभाष चन्द्र, धर्मेन्द्र सिंह, समरपाल सिंह, वीरपाल सिंह आदि ने विचार व्यक्त किये।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम गजरौला.