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EXCLUSIVE : नौगांवा से सपा उम्मीदवार का टिकट मैरीटन में?

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समाजवादी पार्टी के मजबूत स्तंभ और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल सिंह यादव का थोड़े-थोड़े अंतराल में गजरौला के मैरीटन होटल में ठहरने अमरोहा जिले के सियासी माहौल में बदलाव की ओर इशारा करता है। सबसे बड़ा सवाल यहां के सियासी गलियारों में उठ खड़ा हुआ है कि नागपाल परिवार का कोई एक सदस्य क्या जिले की किसी सीट से सपा का उम्मीदवार होने वाला है?

हरीश नागपाल, पूर्व सांसद.
शिवपाल सिंह यादव के नागपाल बंधुओं से करीबी रिश्तों को सभी जानते हैं। यादव पिछले थोड़े समय में मेरीटन होटल में लगातार तीन बार ठहरकर नागपाल बंधुओं की मेहमान नवाजी स्वीकार चुके हैं। वे इस साल जितनी बार भी गजरौला से गुजरे हैं (सड़क या हवाई मार्ग से) मैरीटन होटल में ठहरकर ही गये हैं। इस दौरान पूर्व सांसद दोनों नागपाल बंधु भी मौजूद रहे हैं। देवेन्द्र नागपाल के स्कूल का उद्घाटन भी शिवपाल यादव ने ही किया था। मुरादाबाद जिला सहकारी बैंक का चेयरमेन सपा के एक यादव को बनवाने में भी देवेन्द्र नागपाल की ही प्रमुख भूमिका थी। लोकसभा और विधानसभा  चुनावों से लेकर जिला पंचायत चुनावों तक में देवेन्द्र नागपाल ने सपा की जो सेवा की है उसे शिवपाल यादव तथा उनका पूरा परिवार जानता है।

सूत्रों से पता चला है कि मैरीटन होटल में शिवपाल सिंह यादव और नागपाल बंधुओं के बीच कुछ न कुछ दाल पक रही है जिसकी गंध बाहर निकलनी शुरु हो गयी है। राजनीति के पारखी कहते सुने जा रहे हैं कि देवेन्द नागपाल विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। यह भी लगभग तय हो चुका है कि वे किस सीट से मैदान में होंगे?

यह अनुमान है कि वे अपने जिले से ही लड़ना चाहते हैं। यदि यह सच है तो उन्हें नौगांवा सादात के अलावा कोई सीट नहीं दी जा सकती। क्यों?

क्योंकि मंडी धनौरा आरक्षित है। अमरोहा और हसनपुर पर कैबीनेट मंत्री तथा जिताऊ उम्मीदवार और सपा के कद्दावर नेता मौजूद हैं। केवल नौगांवा सीट बचती है। जिसे मौजूदा विधायक अशफाक अली खां के बजाय किसी दूसरे नेता को देने के कई कारण मौजूद हैं।

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विधानसभा चुनाव में जिले की चारों सीटें सपा ने जीती थीं। सपा लहर की इस जीत में अशफाक खां सबस कम अंतर से चुनाव जीते थे। लोकसभा चुनाव में भी सपा उम्मीदवार को अपनी सीट पर जिता नहीं सके। जिला पंचायत चुनाव में भी घरेलू सीट पर अपने समर्थक को नहीं जिता पाये। नौगांवा सादात जिसे वे तहसील मुख्यालय बनवाना चाहते थे चार साल में विकास खंड भी नहीं बनवा सके। विधायक बनने के चंद माह बाद हुए नगर निकाय चुनाव में उनके विधानसभा क्षेत्र के एक मात्र नगर नौगांवा सादात में चेयरमेन का चुनाव रालोद उम्मीदवार जीता। इन सब कारणों से अशफाक खां के सामने कई चुनौतियां हैं।

एक वजह यह भी है कि सुरक्षित सीट को छोड़ दें तो जिले में शेष तीनों सीटें एक ही समुदाय के लोगों के पास हैं बल्कि फिलहाल एमएलसी भी उसी वर्ग का हो गया। सपा के दूसरे वर्ग का भी कम से कम एक  विधायक उम्मीदवार तो होना ही चाहिए। जिससे वे यह न कह सकें हमारे समुदाय का जब कोई उम्मीदवार ही नहीं तो हम सपा को वोट क्यों दें? इसकी भरपाई के लिए वैसे तो दो उम्मीदवार हिन्दू होने चाहिएं लेकिन एक तो बहुत जरुरी है। ऐसे में नौगांवा के अलावा कोई अन्य सीट नहीं हो सकती।

जिला पंचायत वाला फॉर्मूला लागू हो सकता है

हिन्दू मुस्लिम मतों को साधने के लिए जिस प्रकार सपा ने जिला पंचायत रेनु चौधरी और एमएलसी परवेज अली को दिया था। लगता है हिन्दू मतों के भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण को रोकने के लिए सपा कम से कम एक सीट बहुसंख्यक समुदाय को देगी। वह किसे देना चाहेगी? यह फैसला भी होना है। लेकिन यदि ऐसा हुआ तो यह सीट नौगांवा ही होगी। मैरीटन में शिवपाल का बार-बार ठहराव और नागपाल बंधुओं से गुफ्तगू का अविराम सिलसिला, यह इशारा पूर्व सांसद देवेन्द्र नागपाल की ओर ही है।

यदि नौगांवा सीट से किसी कारणवश सिटिंग एमएलए अशफाक अली खां का पत्ता कटा, तो उनकी तथा उनके समर्थकों की नाराजगी स्वाभाविक है। इसके समाधान के लिए जिला पंचायत वाला फॉर्मूला लागू किया जा सकता है। अशफाक खां को विधान परिषद सदस्य या इसी के समकक्ष कोई पद दिया जा सकता है। ऐसा करने से सपा मजबूत रहेगी तथा पार्टी में एकजुटता को कोई खतरा नहीं होगा बल्कि सभी सीटों पर साम्प्रदायिक गठजोड़ बना रहेगा। बीते एमएलसी चुनाव में सपा उम्मीदवार को रिकॉर्ड मत मिलने में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में अपनाया फॉर्मूला ही एक बड़ी वजह था।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम गजरौला.