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गांव, गरीब और किसान के द्वार तक कौन पहुंचायेगा विकास की गंगा

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सूखे, बेरोजगारी और सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार से जनता परेशान है। किसान, छात्र और मजदूर आत्हत्यायें करने को मजबूर हैं। देश और प्रदेश के नेता वातानुकूलित भवनों में आराम की नींद ले रहे हैं। कोई अपनी कुर्सी बचाने और कोई फिर से सत्ता हासिल करने की जोड़गांठ में संलग्न है। जनता की परेशानी की किसी भी राजनैतिक पार्टी को चिंता नहीं।

देश में सबसे अधिक सांसदों और विधायकों वाले सूबे उत्तर प्रदेश की सत्ता पर कब्जा करने के लिए जहां भाजपा, बसपा और कांग्रेस सरीखे दल मंथन में जुटे हैं, वहीं सपा फिर से यहां सत्ता पर काबिज रहने के लिए हर दांव आजमाने में रात दिन एक कर रही है। इन सभी दलों के नेता जनता का सबसे बड़ा हमदर्द बनने का नाटक करने की तैयारी में जुट गये हैं। जबकि जनता इन एक ही थैली के चट्टे बट्टों को बार-बार परखती रही है और एक से बढ़कर एक छलावे में छली जाती रही है।

मुख्यमंत्री के पिता को अपना बेटा राजा भोज दिखाई दे रहा है. मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और उनके चमचों को पूरे सूबे में विकास की नदियां दिखाई दे रही हैं.


कभी धर्म, कभी जाति और कभी इसी तरह के दूसरे मुद्दों को सामने लाकर लोगों की भावनाओं को भड़काकर सरकारें बनती-बिगड़ती रहीं लेकिन इस सबसे बड़े सूबे के हालत सुधरने के बजाय बद से बदतर होते गये। जो लोग आज कुर्सी पर विराजमान हैं, उन्हें चारों और खुशहाली नजर आ रही है। मुख्यमंत्री के पिता को अपना बेटा राजा भोज दिखाई दे रहा है। मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और उनके चमचों को पूरे सूबे में विकास की नदियां दिखाई दे रही हैं। ये लोग कह रहे हैं, चार साल में जो विकास हुआ है, उतना पिछले चालीस साल में भी नहीं हुआ। एक तरह से इन लोगों की बात ठीक लगती है। वास्तव में मुख्यमंत्री, उनके परिवार, मंत्रियों और विधायकों का तो ऐसा ही विकास हुआ है जैसा किसी का चालीस साल में भी नहीं हुआ। आम आदमी से इन्हें क्या लेना? इनका विकास है तो फिर सबका विकास है। दूसरों के विनाश में ही इनके विकास का रहस्य छिपा है।


दिल्ली वाले अपने पीएम और लखनऊ वाले अपने सीएम की तारीफों के पुल बांधकर गांव वालों को बहकाने निकलने वाले हैं.


दिल्ली और लखनऊ दोनों जगह बैठे सत्ताधीश अपने चेले-चपाटों से कह रहे हैं कि गांवों में पहुंचो और लोगों को बताओ कि सपा के चार साल और भाजपा के दो साल में देश में इतनी तरक्की कर ली जो आजादी के साठ साल में भी नहीं हुई। देश आर्थिक रफ्तार पर है, जो जल्दी ही लंबी छलांग लगाने वाला है। दिल्ली वाले अपने पीएम और लखनऊ वाले अपने सीएम की तारीफों के पुल बांधकर गांव वालों को बहकाने निकलने वाले हैं। अभी वातानुकूलित भवनों में सबकुछ बहुत सुखद है। परंतु जब बाहर आओगे तो पता चलेगा कि आम आदमी को पीने का पानी भी मयस्सर नहीं। जेब में पैसा नहीं। बैंक से लिया कर्ज चुकाने लायक फसल ही नहीं हो पायी। गन्ने का भुगतान मिल नहीं कर रहे।

माल्या नौ हजार करोड़ लेकर भाग जाये तो कोई बात नहीं. किसान थोड़ी राहत चाहे तो केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री सिन्हा कहते हैं इससे लोगों की आदत बिगड़ती है.


हम और आप (जनता) देख रहे हैं कि सरकारी प्रचार पर जनता के धन की बरबादी की जा रही है। पहले ही जिनके पास धन के अकूत भंडार हैं, उन्हें सरकारों ने अपने खजाने खोल दिये हैं। अधिकांश फिल्मी सितारों को जनता के धन की खुली लूट का रास्ता दे दिया है। वे सरकारी विज्ञापनों में अपना चेहरा दिखाकर हमारे हिस्से का पैसा डकार रहे हैं। कई क्रिकेटरों को भी इसी तरह पैसा दिये जाने का रास्ता निकाल लिया गया है। नेता, अभिनेता और क्रिकेटर सरकारों को सबसे गरीब दिखाई दे रहे हैं। ये पानी बरबाद कर, उन लोगों को पानी बचाने का उपदेश दे रहे हैं, जिनके पास पीने को भी पानी नहीं। ये उनसे शौचालय जाने को कह रहे हैं, जिनके पेट में शौच जाने के लिए कई-कई दिन तक कुछ पहुंचता ही नहीं। गंगा को गंदी करने वाले दूसरों को उपदेश दे रहे हैं, गंगा गंदी मत करो। टीवी चैनलों तथा अखबारों में इस तरह के सरकारी विज्ञापनों की बाढ़ है जिनपर प्रतिदिन जनता की जेब से गया सरकारी खजाने का करोड़ों रुपया बहाया जा रहा है। ये चैनल और अखबार औद्योगिक घरानों के हैं तथा स्वयं में विशाल औद्योगिक शक्ल ले चुके।

भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस जैसे जिस भी दल के प्रचारक गांवों में जायेंगे, इस बार इन सभी का स्वागत जनता अच्छी तरह करने को तैयार है। इन सबने जो विकास की गंगा बहाई है, उसकी दिशा और दशा के दर्शन जनता दरबार में उन्हें जरुर कराये जायेंगे।

-जी.एस.चाहल.