Header Ads

केसीसी की ब्याज सब्सिडी कहां गयी?

kcc-farmer-subsidy

किसानों के उत्थान का राग अलापने वाली भाजपा सरकार किसानों का गला घोंटने का हर संभाव हथियार चलाने में माहिर है। बैंकों में केन्द्र द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड पर दी जा रही चार फीसदी की सब्सिडी काफी समय से नहीं आयी। जिसके कारण किसानों को पूरा ब्याज देना पड़ रहा है। मंडी धनौरा के किसान काफी समय से भाकियू की ब्लॉक इकाई के बैनर तले इस संबंध में आंदोलनरत हैं। कई सप्ताह से चले आंदोलन के कारण सहकारी बैंक के बड़े अधिकारियों के साथ किसानों की बात हुई तो अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि तीन की जगह सात फीसदी ब्याज बैंक इसलिए ले रहा है कि इसमें पहले चार फीसदी केन्द्र सरकार देती थी, जो अब वहां से बंद है। जब केन्द्र नहीं दे रहा तो यह पैसा किसानों से लिया जा रहा है। वहां से पैसा आ जायेगा तो आपके खातों में जमा कर देंगे।

उल्लेखनीय है कि केन्द्र की यूपीए सरकार ने किसानों को सस्ता ऋण उपलब्ध कराने के लिए सात फीसदी ब्याज दर पर कर्ज की योजना लागू की थी। जिसमें चार फीसदी ब्याज सरकार तथा तीन फीसदी किसान को देने का नियम है। केन्द्र की सत्ता बदलते ही, सरकार द्वारा दिया जाने वाला चार फीसदी धन धीरे-धीरे सभी बैंकों में या तो बंद करना शुरु कर दिया गया अथवा एक साल बाद भी आधा-अधूरा पैसा ही भेजा गया। अब हालत और भी खराब है। सहकारी हो या सरकारी किसानों को सात फीसदी ही भुगतान करना पड़ रहा है बल्कि थोड़ा विलम्ब होते ही यह दस फीसदी से भी ऊपर लिया जाने लगा।

केन्द्र और राज्य दोनों ही सरकारें करोड़ों रुपये प्रतिमाह इसी काम के प्रचार पर खर्च कर रही हैं कि वे किसानों की बड़ी हमदर्द हैं जबकि हकीकत इसके विपरीत है। सूखे के नाम पर भी सपा भाजपा में नूराकुश्ती हो रही है। वर्षों से सूखा पीड़ित बुन्देलखंड के किसान मर रहे हैं, लेकिन  दोनों सरकारें एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने के सिवाय पीड़ित किसानों के लिए कुछ नहीं कर रहीं। सूखे के नाम करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से निकाले जाते रहे हैं। कुएं खुदवाने को 2012 में केन्द्र से दिये रुपयों से अभी तक कुएं नहीं खुदे। प्रति किसान के नाम पर चित्रकूट समेत कई जिलों के किसानों को प्रति कुआं 3 लाख 15 हजार रुपये भेजे गये थे।

-जी.एस. चाहल.