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एकता के अभाव में शोषण का शिकार अन्नदाता

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किसान हितों की लड़ाई कमजोर पड़ने का सबसे बड़ा कारण कई समानान्तर संगठन खड़े हो जाना है। इन संगठनों के कारण किसान भी कई धड़ों में बंट गये। इनमें कई किसान नेता जहां निस्वार्थ भाव से किसानों के साथ खड़े हैं, वहीं बहुत से नेता निजि स्वार्थाें में लिप्त हो इन संगठनों को कमजोर कर रहे हैं।

इस समय उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन (असली), भारतीय किसान यूनियन (भानु) तथा भारतीय किसान मजदूर संगठन नामक चार किसान संगठन खास तौर से अराजनैतिक रुप में काम कर रहे हैं। इन सभी संगठनों में जो पदाधिकारी हैं, वे पहले चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत की भाकियू से जुड़े थे। उसी के विभाजन से अलग-अलग संगठन अस्तित्व में आये।

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जबतक सभी संगठन एकजुट होकर किसान समस्याओं के लिए एक मंच पर एक साथ नहीं आयेंगे तबतक किसानों की सुनवाई नहीं होने वाली.


एकजुटता समाप्त होने से भले ही कई संगठन बन गये लेकिन जो शक्ति अकेले संगठन में थी वह समाप्त हो गयी। किसानों का वैसे भी इस तरह के संगठनों से मोह भंग हो गया है। यही कारण है कि भारी शोर शराबे के बावजूद सरकार इन संगठनों की ओर कोई ध्यान नहीं देती।

इन सभी संगठनों में भारतीय किसान मजदूर संगठन के नेता सरदार वीएम सिंह बिना किसी चंदे आदि के अपने जेब खर्च से किसानों के पक्ष में अदालतों में कई मुकदमे जीत चुके। किसानों में उनके प्रति विश्वास है। लोग ये भी मानते हैं कि उन्होंने वास्तव में किसानों के हितों की असली लड़ाई लड़ी है तथा वे आज भी लड़ रहे हैं।

परंतु जब इस संगठन के समानांतर भी तीन अन्य संगठन अस्तित्व में हैं तो किसानों की एकजुटता नहीं हो सकती। जबतक ये सभी संगठन एकजुट होकर किसान समस्याओं के लिए एक मंच पर एक साथ नहीं आयेंगे तबतक किसानों की सुनवाई नहीं होने वाली। किसान नेताओं का अहम और निजि स्वार्थ किसानों के हितों की लड़ाई में सबसे बड़ी बाधा है। किसानों को सही नेता की पहचान कर, दूसरों से पल्ला झाड़ एकजुट होना होगा। तभी सफलता मिलेगी।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम अमरोहा.