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किसान दुघर्टना बीमा एक बड़ा छलावा सिद्ध हो रहा है

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किसान दुघर्टना बीमा किसानों के लिए एक बड़ा छलावा सिद्ध हो रहा है। यह कहने में कोई आपत्ति नहीं कि यह छोटे और गरीब किसानों को ठगने का एक सरल साधन है। अकेले उत्तर प्रदेश के 72 जिलों के 2884 किसान परिवार एक साल बाद भी दावे की बीमा राशि नहीं पा सके। बरेली के 32 किसान परिवार ऐसे हैं, जिन्हें एक करोड़ 60 लाख रुपये पिछले साल दिसम्बर से पहले मंजूर हो चुके लेकिन अभी तक उन्हें एक भी पैसा नसीब नहीं हुआ।

जब किसान वादे के मुताबिक मोदी सरकार से गन्ने और गेहूं आदि का लागत से डेढ़ गुणा मूल्य मांग रहे थे, तो उन्होंने बड़े जोर शोर से नयी फसल बीमा योजना शुरु करने का दावा किया।

किसान जानते हैं कि सरकार की बीमा योजनायें किसानों की जेबों से पैसा खींचकर बीमा कंपनियों को मालामाल करने का साधन मात्र हैं।

प्रधानमंत्री ने फसलों की उचित कीमतों की मांग से ध्यान भटकाने को एक यह और बहाना गढ़ा था। कोई बड़ा किसान बीमा क्लेम भले ही लेने में सफल हो जाये, बेचारा लघु सीमांत किसान तो इस योजना में लुटता ही है। किश्त छोटी हो या बड़ी इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। किसान की तकदीर बदलनी है तो उसे उसके उत्पाद का उचित और लाभकारी मूल्य देने के अलावा और कोई रास्ता नहीं। बीमा योजना की हकीकत सूबे के 2884 किसान बयान करने को पर्याप्त हैं।

-जी.एस. चाहल.