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सांसद आदर्श ग्राम योजना बुरी तरह विफल

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प्रधानमंत्री बनते ही नरेन्द्र मोदी द्वारा जारी की गयी सांसद आदर्श ग्राम योजना बुरी तरह धड़ाम हो गयी है। ऐसे सांसदों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो इसे बंद कराने को कह रहे हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति का कहना है कि उनके पास बहुत से सांसदों के आवेदन इसे बंद कराने के लिए आये हैं।

सांसदों का कहना है कि यह देश की पहली ऐसी योजना है जिसके लिए सांसदों को अलग से धन नहीं दिया गया। बिना धन के ही पीएम सांसदों से गांवों का विकास कराने की फिराक में हैं। समिति ने योजना को बंद करने की सिफारिश के बजाय मंत्रालय से धन उपलब्धता पर जल्दी फैसला करने को कहा है।

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देश के ऐसे सभी गांव जो सांसदों द्वारा आदर्श गांव बनाने हेतु गोद लिये गये थे, मोदी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के बावजूद विकास की बाट जोह रहे हैं। इस योजना से उन गांवों के लोगों से भी अधिक क्षेत्रीय सांसद मुसीबत में पड़ गये हैं। इससे उनके खिलाफ माहौल बन रहा है और जनाक्रोश की शुरुआत हो चुकी। इसी से चिंतित सांसदों ने समिति से सांसद आदर्श गांव योजना को बंद करने का आवेदन किया है।

मजेदार बात यह है कि प्रधानमंत्री द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र के गोद लिए गांव तक को आदर्श बनवाने की सुध नहीं ली, जिसके कारण पंचायत चुनाव में वहां भाजपा उम्मीदवार हार गया। सांसदों को डर है कि विधानसभा चुनावों में भाजपा को इस योजना में काम न होने का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, जो उनके लिए भी बुरे दिनों का संकेत होगा।

-जी.एस. चाहल.