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उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस बेचैन है। उसकी बेचैनी जायज है। केन्द्र में नरेन्द्र मोदी सरकार और बिहार में नीतीश कुमार की जीत का श्रेय प्रशांत किशोर को मिल चुका है। उसके बाद उनकी बूझ राजनीति में बढ़ गयी है। वे पर्दे के पीछे रहकर अपना रोल निभाने के लिए जाने जाते हैं।

इस बार कांग्रेस चाह रही है कि उत्तर प्रदेश में उनकी नैया को सहारा मिल जाये और पार्टी फिर से जीवित होकर अपना बेड़ा पार लगा ले। लेकिन जहां तक पार्टी की मौजूदा स्थिति पर गौर करें तो प्रशांत किशोर के कई महीने की माथापच्ची के बाद भी कांग्रेस के अंदरुनी हालात सुधरे नहीं हैं।

पिछले दिनों एक सभा में कांग्रेसी आपस में उलझ गये थे। ऐसा भाजपा में भी होता रहता है, लेकिन कांग्रेस इस समय संकट के दौर से गुजर रही है। उसे मामूली थपेड़े बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं। उसकी नैया पार लगने के बजाय डूब सकती है।

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राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में काफी समय से भागदौड़ कर रहे हैं, लेकिन परिणामों में उतना परिवर्तन नहीं आया है। लगता है उनके कारण हालात बदलने वाले नहीं। इसलिए कांग्रेस के अंदर से फिर आवाजें उठनी शुरु हो गयी हैं कि प्रियंका गांधी को प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाये। हालांकि प्रशांत किशोर सभी पहलुओं पर विचार कर रहे होंगे।

चर्चायें जारी हैं कि प्रशांत थोड़े समय बाद प्रियंका गांधी को मैदान में लाने की बात मजबूती से रखेंगे। उधर सोनिया गांधी अभी गहन मंथन कर रही हैं क्योंकि वे राहुल गांधी को जिस तरह एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखने के लिए प्रेरित करती रही हैं, उसमें बाधा नहीं आनी चाहिए।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम के लिए मोहित सिंह.