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झोलाछाप और मौन धारण किये स्वास्थ्य विभाग

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झोलाछाप चिकित्सकों की सांठगांठ के कारण आयेदिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जब मरीजों की जान पर बन आती है। चिकित्सा विभाग ऐसा नहीं कि जानता नहीं कि अमरोहा जिले में कितने झोलाछाप हैं या वह जानकर भी अन्जान बना हुआ है। जबतक मीडिया में मामला सामने नहीं आता कुछ नहीं होता। कार्रवाई की बात की जाती है। झोलाछाप पकड़ा भी जाये तो वह जेल से छूटकर फिर वही काम शुरु कर देता है।

गजरौला के एक गांव में एक निजि मेडिकल स्टोर संचालक पर एक युवक का गलत तरीके से उपचार करने का आरोप लगा। बिना डिग्री के वह मरीजों का इलाज कर रहा था। यह सिलसिला आज से नहीं लंबे समय से जारी था। यह कैसे माना जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग जो अपने पैनी निगाह की बात करता है, उसे पता नहीं चल सका।

कक्षा 11 के छात्र के हाथ का गलत तरीके से उपचार होने के बाद जब वह सही नहीं हुआ तो मामला पकड़ में आया। यदि उसका हाथ तभी सही हो जाता तो झोलाछाप के खिलाफ वह एफआइआर क्यों करता? इसी तरह के मामले रोज होते हैं जब गांवों आदि में लोग झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज कराते हैं। कई ठीक हो जाते हैं, कई के केस बिगड़ जाते हैं और कई की मौत भी हो जाती है।

ऐसे एक नहीं अनेक झोलाछाप लोगों का मोहल्लों, कस्बों में इलाज कर रहे हैं। चिकित्सा विभाग के आला आधिकारी मौज में हैं। ऐसा लगता है जैसे उन्होंने मौन धारण किया हुआ है। मामला चर्चा में आने पर ही कार्रवाई हो रही है। कार्रवाई के बाद फिर से झोलाछाप अपना धंधा चालू कर देते हैं। यह सिलसिला जारी है।

-गजरौला टाइम्स डाॅट काॅम गजरौला.