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किसान नील गायों की हत्याओं के खिलाफ़

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केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा बिहार में नील गायों को मारने की इजाजत देने से लोगों में रोष है। बिहार में जावड़ेकर के आदेश पर ढाई सौ नीलगायें मौत के घाट उतारने का मामला प्रकाश में आया है। जावड़ेकर के अनुसार कई राज्यों में नील गायें मौत के घाट उतारने की तैयारी है। यह सब कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। दूसरी ओर केन्द्र सरकार की एक अन्य मंत्री मेनका गांधी इसका विरोध किया है।

नीलगायें मारने में दलील दी जा रही है कि वे दहलन फसलों को नष्ट कर रही हैं। इसलिए उनका खात्मा जरुरी है। नील गायों को मारने की जो लोग यह दलील दे रहे हैं वे खेती नहीं करते। जबकि किसानों का कहना है कि वे नीलगायों के कत्लेआम के खिलाफ हैं। जंगलों में अवैध कटान, अग्निकांड तथा पीने के पानी की किल्लत के कारण यह जानवर खेतों का रुख करते हैं। वे इंसान की गलतियों के कारण जंगलों से खेतों की ओर पलायन कर रहे हैं। ऐसे में उनका कत्लेआम बहुत घिनौना और घृणित कृत्य है। हम फसलें खाने के बहाने इस बेकसूर और मासूम जीव की हत्या सहन नहीं करेंगे।

किसानों का यह भी कहना है कि फसलें हमारी हैं। जब हम शिकायत नहीं कर रहे तो उन लोगों को क्या दिक्कत है जो खेती करते ही नहीं। किसानों से हमदर्दी है तो प्रकाश जावड़ेकर किसानों की फसलों का उचित दाम दिलायें। किसानों के कर्ज माफ करायें। गौ हत्या बंद कराकर वोट बटोरने वालों को नील गायों की हत्या करवाते हुए शर्म आनी चाहिए।

भाकियू नेता डूंगर सिंह, भारतीय किसान संघ नेता जयवीर सिंह, पूर्व सपा जिलाध्यक्ष डा. जितेन्द्र यादव, भाजपा नेता सुरेन्द्र औलख, तथा भाजपा नेता रामकृष्ण चौहान, अशोक कश्यप, सोनू कश्यप आदि ने मांग की है कि नील गायों की हत्या बंद की जाये।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम अमरोहा.