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मूंढाखेड़ा विवाद प्रशासनिक लापरवाही की देन

मूंढाखेड़ा विवाद प्रशासनिक लापरवाही

जिले के कई गांव संवेदनशील हैं। इन गांवों में साम्प्रदायिक सौहार्द की आपसी डोर जर्जर होती जा रही है। सदियों से एक साझा परिवार की तरह मेल-मिलाप से रहने वाले साम्प्रदायों में पिछले कुछ वर्षों में पहली वाली बात नहीं है। कई गांवों में बीते एक-दो वर्षों के दौरान मामूली बातों को आपसी टकराव में बदल दिया गया। कई गांवों में हिंसा भी हुई। जिसे जिला प्रशासन ने अपने ढंग से शांत किया अथवा बिना गहरायी तक जाये ताकत के बल पर दबाकर यह जताने की कोशिश की कि मामला सुलझ गया। कई गांवों में महीनों, कहीं वर्षों तथा कहीं आज भी पुलिस तैनात है। बहुत से लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी अमल में लायी गयी है। फिर भी सवाल यही है कि आखिर क्यों बार-बार आपसी तनाव और हिंसा की लपटें उठने लगती हैं? कौन है इस तरह के समाज विरोधी कारनामों के पीछे?


इस बार प्रशासन ने समझदारी और बिना दबाव के काम किया तो यह मामला सुलझ जायेगा अन्यथा चुनावी माहौल है, कई तत्व इसे भड़काने की पूरी कोशिश करेंगे.


ताजा उदाहरण मूढ़ाखेड़ा गांव का है। यहां एक साल से भी अधिक समय से मंदिर पर लाउडस्पीकर बजाने को लेकर झगड़ा होने की नौबत आती है। एक पक्ष लाउडस्पीकर बजाना चाहता है, तो दूसरा पक्ष उसका विरोध करता है। उसका कहना है कि उसे भी बजाने से न रोका जाये। पुलिस और प्रशासन समस्या का ईमानदार फैसला करने के बजाय दबाव का रास्ता निकालते हैं। दोनों ओर से समान संख्या में समान धाराओं यथा शांतिभंग आदि के तहत कुछ लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है। गलती किसी की भी हो, या न हो, कार्रवाई दोनों पक्षों पर एक समान चलती है। कभी-कभी राजनैतिक दबाव में पीड़ित के खिलाफ भी कार्रवाई होती देखी जाती है। इस तरह जहां मामला सुलझाया जा सकता था, वह भी उलझ कर और पेचीदा हो जाता है।

पिछले वर्ष मूंढाखेड़ा में पहली बार विवाद शुरु हुआ तो पुलिस की लापरवाही और बाद में पुलिस तथा प्रशासन पर राजनैतिक दबाव ने सुलझते मामले को उलझा दिया। बाद में उसे डंडे के जोर पर दबाया गया लेकिन समाधान नहीं किया गया। यही कारण है कि दबी चिंगारी एक साल बाद फिर जी उठी। इस बार प्रशासन ने समझदारी और बिना दबाव के काम किया तो यह मामला सुलझ जायेगा अन्यथा चुनावी माहौल है, कई तत्व इसे भड़काने की पूरी कोशिश करेंगे। बहुत गंभीरता से विचार कर इसे हल किया जाना जरुरी है।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम अमरोहा.