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नौगावां तहसील प्रकरण : अशफाक के लिए आगे कुंआ, पीछे खाई

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हमने दोबारा से नौगांवा तहसील का मुद्दा उठने पर कहा था कि यह प्रकरण विधायक अशफाक खां के लिए खतरे की घंटी सिद्ध होगा। अब खुद सपा कार्यकर्ताओं द्वारा ही अशफाक खां को पार्टी से निकालने तक की मांग उठने लगी है और उनके विधानसभा क्षेत्र में उन्हीं की पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा अशफाक खां का पुतला फूंकना जाहिर करता है कि अशफाक खां की सियासी जमीन उनके पैरों से खिसक चुकी है। कई लोगों ने लिखित में उन्हें पार्टी से निकालने तक की मांग हाईकमान से की है।

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विधायक के लिए अब तहसील प्रकरण आगे कुआं, पीछे खाई वाली स्थिति बन चुकी है। हम पहले भी लिख चुके हैं कि तहसील बनने से उनके आधे समर्थक नाराज होंगे। वे ऐसे लोग होंगे जिन्हें नौगांवा आने जाने में भारी दिक्कत, बड़ा खर्च और अधिक समय लगेगा। यदि वह नहीं बनेगी तो नौगांवा तथा उससे सटे गांवों के लोग उनसे नाराज हो जायेंगे। यदि कार्यालय नगर में बन गया, जिसे मौलाना आब्दी का समर्थन है, तब तो क्षेत्र के अस्सी फीसदी सपा समर्थक नाराज हो जायेंगे।

नया विवाद खतरनाक है। इसने पार्टी में ही फूट के बीज बो दिये हैं। भले ही इसके पीछे दर्जा राज्यमंत्री मौलाना आब्दी का हाथ है, लेकिन इसका खामियाजा सपा और विधायक अशफाक खां दोनों को भुगतना पड़ेगा। एक तरह से मौलाना की कारगुजारी का खामियाजा अशफाक खां को भुगतना पड़ रहा है। अब हालात ये हैं कि लाख कोशिश करने पर भी मामला शांत नहीं होने वाला। तहसील प्रकरण ठंडे में डालने से ही कुछ लाभ हो सकता है। जैसे ही भूमि चयन का काम शुरु होगा सपाईयों में तलवारें खिंचनी शुरु हो जायेंगी।

वैसे विधायक द्वारा चयनित स्थान ही तहसील के लिए सबसे उपयुक्त है लेकिन मौलाना या धार्मिक नेता इन चीजों को नहीं समझते। राजनीति और धर्म भारत जैसे बहुलतावादी देश में अलग-अलग होने चाहिए। मौलाना के समर्थक केवल इससे विधायक का ही नुकसान नहीं कर रहे बल्कि वे यहां की शांति व्यवस्था को भी क्षति पहुंचायेंगे।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम गजरौला.