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एम. चन्द्रा इसे कुर्सी की गर्मी में भले नहीं समझें लेकिन सपा का एक बड़ा गुट अच्छी तरह जान गया है कि इस बार सपा की यह सीट नहीं बचा पायेंगे.

अमरोहा की यह ऐसी सीट है जिसे सपा ने पिछले चुनाव में बिना जोर लगाये आसानी से जीता था। बसपा विरोधी लहर के कारण यह संभव हो पाया था। सपा उम्मीदवार एम. चन्द्रा ने जनसंपर्क भी पूरा नहीं किया था और बाजी मार गये। लगता है वे इस बार भी ऐसा ही सोच रहे हैं। यदि उन्हें ऐसा लगता है तो वे खुशफहमी पाले बैठे हैं। इस बार इस सीट पर लोग सपा के साथ ही उनके भी खिलाफ हैं। एम. चन्द्रा इसे कुर्सी की गर्मी में भले नहीं समझें लेकिन सपा का एक बड़ा गुट अच्छी तरह जान गया है कि एम. चन्द्रा इस बार सपा की यह सीट नहीं बचा पायेंगे।

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एम. चन्द्रा की सबसे बड़ी कमी यह बतायी जा रही है कि वे मात्र मंडी धनौरा तक ही सीमित हो कर रह गये हैं। उन्हें विधानसभा क्षेत्र के गांवों तथा लोगों से बात करने तक का समय नहीं है। या तो वे नगर में अपने घर में कैद होते हैं अथवा लखनऊ या दूसरे स्थानों पर बताये जाते हैं। गजरौला क्षेत्र में वे कभी-कभी गये होंगे तो अपने ही किसी काम से गये होंगे। यहां के स्कूल, कालेज तथा अन्य स्थानों पर किसी समारोह आदि में विधायक अशफाक खां या मंत्री कमाल अख्तर को लोग बुलाना बेहतर समझते हैं। कार्यकाल समाप्त होने को आया लेकिन विधायक गजरौला और उसके निकटवर्ती गांवों में यह तक देखने नहीं आये कि उनका इलाका कैसा है या लोगों की जरुरतें क्या हैं?

पिछले दिनों पूरे सूबे में साईकिल रैलियों का आयोजन किया गया लेकिन विधायक उनसे भी नदारद रहे। हां कुछ अखबारों में विज्ञापन देकर अपने बेटे के साथ अपनी फोटो जरुर छपवा दी।

पार्टी सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि सपा सुप्रीमो जिन गैर जिताऊ तथा निष्क्रिय विधायकों का पत्ता साफ करने के लिए जांच कर रहे हैं उनमें एम. चन्द्रा का नाम भी शामिल है। सपा हर हाल में चुनावी जीत चाहती है। ऐसे में सौ के करीब विधायकों का टिकट काटे जाने की संभावना है।

-टाइम्स न्यूज़ मंडी धनौरा.


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