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अमरोहा के सैकड़ों गांवों की हजारों हेक्टेयर फसल जलमग्न

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मंडी धनौरा तहसील के खादर में चांदरा फार्म तथा शेरपुर से नीचे के क्षेत्र में स्थित किसानों के खेतों में बाढ़ का पानी लबालब भर गया है

इस बार वर्षा से जहां जिला अमरोहा में किसानों की एक बड़ी आबादी को लाभ हो रहा है वहीं खादर के करीब सवा सौ गांवों के किसानों के लिए इस बरसात ने अनेक मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। इन गांवों के हालात बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों की तरह हो गये हैं। जिले की मंडी धनौरा तथा हसनपुर तहसील का बहुत बड़ा कृषि क्षेत्र पानी में डूबा है। यदि मौसम साफ नहीं हुआ और पर्वतीय तथा गंगा तटवर्ती इलाकों में बारिश इसी तरह बरसती रही तो गंगा के खादर में बसे गांवों के लोगों की दिक्कतें और अधिक बढ़ जायेंगी।

मंडी धनौरा तहसील के खादर में चांदरा फार्म तथा शेरपुर से नीचे के क्षेत्र में स्थित किसानों के खेतों में बाढ़ का पानी लबालब भर गया है। शाहजहांपुर सहित कई गांवों में गंगा तथा बाढ़ का पानी खेतों में भर गया है। यहां गन्ना, धान और बाजरे की फसलें खड़ी हैं जो कई स्थानों पर पानी में डूब चुकीं। गन्ने को छोड़ शेष सभी फसलों में भारी नुकसान का खतरा बढ़ गया है। अभी पूरी बरसात तक बारिश की संभावना से किसानों के चेहरों पर हवाईयां उड़ रही हैं। चारे की दिक्कत होने से पशुओं को मजबूरी में लोग बेच रहे हैं या दूसरे सुरक्षित स्थानों की ओर ले जा रहे हैं।

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मंडी धनौरा के ही चकनवाला के निकट पानी आने से रामगंगा पोषक नहर को पार कर आने वाले लगभग एक दर्जन गांवों के सामने पुल तोड़े जाने से भारी समस्या है। इन गांवों को नाव के सहारे जारी काम को गजरौला या बछरायूं जाने को जाना पड़ रहा है। जाटोंवाली, सीसोवाली, मीरापुर, नाव वाला, बिसावली, शाहजहांपुर, आदि के लोग चारों ओर से बाढ़ में घिरे हैं। इनका संपर्क शेष इलाके से कट गया है। यहां शासन या प्रशासन स्तर से दवाईयां, राशन आदि कोई भी आपातकालीन सेवा जरुरत पड़ने पर मुहैया नहीं करायी जा रही।

हसनपुर के मोहम्मदाबाद के पास से मेहरपुर गांव तक हसनपुर बांध के पास गंगा का पानी आने की संभावना से वैसे तो अलर्ट जारी है लेकिन जलमग्न हुए हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में खड़ी फसलों को खतरे का कोई प्रबंध नहीं। चारा तक जल में डूबता जा रहा है। कुछ लोग गले तक पानी से चारा काट कर लाते देखे गये हैं। अधिकांश पशु कई दिन से भरे पानी में खड़े चारे को नहीं खा रहे इसलिए सूखे भूसे पर ही निर्भर हैं।

तिगरी में एक बाढ़ चौकी जरुर है लेकिन वहां मौजूद एक या दो कर्मचारी जलस्तर मापने तक ही सीमित हैं। तिगरी और ब्रजघाट में गंगा में उफान के बावजूद खतरे के निशान से काफी नीचे है।

बाढ़ से घिरे गांवों की सहायता की जरुरत


पानी में घिरे गांवों में इस समय दवाईयां और चिकित्सकों की जरुरत है। लोगों तथा पशुओं में बरसात में महामारी का खतरा उत्पन्न हो जाता है।

चकनवाला से आगे पानी में घिरे एक दर्जन गांवों के लोग बाढ़ में घिरे हैं। जिनके आवागमन का रास्ता बाढ़ से बंद है। इसलिए उनकी सुरक्षा तथा खानपान और दवा आदि का तुरंत प्रबंध जरुरी है। खाना बनाने तक के ईंधन का अभाव हो गया है। मिट्टी का तेल, गैस और राशन भी तुरंत भेजा जाना चाहिए। अभी तक जिला या तहसील स्तर से इन लोगों की किसी ने सुध नहीं ली।

-गजरौला न्यूज़.


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