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शराब का अवैध कारोबार : हसीन सपनों के पीछे दूसरों की बरबादी की कहानी

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शराब के अवैध धंधों ने अमरोहा जिले में कई लोगों को राजनीतिज्ञ से लेकर समाजसेवी तक बना दिया.

त्योहारों के आसपास अवैध शराब के कई कारोबारी पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा पकड़े जाते हैं। इनमें दो तरह के अपराधी होते हैं। एक कच्ची शराब बनाने वाले और दूसरे राज्यों से सस्ती शराब यहां लाकर बेचने वाले होते हैं। इस अवैध कारोबार को करने वाले चन्द लोग ही ऐसे होते हैं, जिन्हें पकड़ा जाता है। इस धंधे से जुड़े अधिकांश लोगों पर या तो पुलिस हाथ ही नहीं डालती, अथवा पकड़ती भी है तो वे सफेदपोश दलालों के दबाव के चलते कानूनी शिकंजे तक नहीं पहुंच पाते। यही कारण है कि अमरोहा जनपद ही क्या पूरे सूबे में यह अवैध कारोबार अपनी रफ्तार से हमेशा चलता रहता है। भले ही शराब के आदी बहुत से लोग अपना धन, सेहत, सम्मान और जान तक खोते जा रहे हैं, लेकिन इस अवैध धंधे के सहारे हजारों परिवारों की रोजी रोटी भी चल रही है। चन्द लोगों को आबाद करके एक बड़ी आबादी को बरबाद करने वाला यह कारोबार कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।

जिले के एक छोर से दूसरे सिरे तक दहकती हैं शराब की भट्टियां

अमरोहा जनपद में वैसे तो गंगा के खादर का क्षेत्र कच्ची शराब बनाने के लिए बदनाम है लेकिन सभी थाना क्षेत्रों में यह अवैध कारोबार जारी है। आबकारी विभाग और पुलिस बहुधा चुनिंदा स्थानों पर छापामारी करती है। उसे पता होता है कि कहां-कहां कच्ची शराब बनती है तथा कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं। उसे तय करना होता है कि किसे पकड़ना है और किसे पास तक उसे फटकना तक नहीं। यही कारण होता है कि हर बार वही लोग पकड़े जाते हैं, जो एक बार पकड़े गये थे। बहुत कम देखने में आया है कि जब कोई नया नाम सामने आया हो। इसी के साथ पुलिस इस तरह कार्यवाही करती है या सबूत तैयार करती है कि मामूली जुर्माना देकर आरोपी छूटने में सफल हो जाते हैं। यदा-कदा किसी को सजा हो भी गयी हो तो ऐसे मामले दुर्लभ ही होते हैं।

गजरौला की बस्ती में मायापुरी तथा चौहानपुरी में कच्ची शराब बनाने और बेचने की आम शिकायते हैं। कई बार आबकारी तथा थाना पुलिस की छापामारी भी हुई, शराब भी बरामद हुई लेकिन कौन पकड़ा गया, कोई जेल गया या नहीं, न कोई पूछने वाला और न बताने वाला। एक-दो बार मोहल्ले की औरतों तक ने अपने परिवार के लोगों के खिलाफ भी आवाज उठाई लेकिन कुछ नहीं हुआ।

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खादर क्षेत्र के अधिकांश गांवों में धनौरा से लेकर गंगेश्वरी तक कच्ची शराब की भट्टियां दहकती हैं। पीने वाले और बेचने वाले, दोनों ही यहां बड़ी तादाद में हैं। पुलिस, प्रशासन और आबकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी इसके बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं। जरुरत पड़ने पर पीने वाले और पिलाने वाले दोनों ही इनके लिए दुधारु गाय सिद्ध होते हैं। इसलिए इस धंधे के चलते रहने में उन लोगों का बड़ा हाथ है, जिन्हें इस अवैध धंधे को रोकने के लिए सरकार ने मोटे वेतन, संसाधन और दूसरी सुविधायें देकर नियुक्त किया है।

सफेदपोश, दलाल और कई जनप्रतिनिधि इस धंधे में संलिप्त तत्वों की हर संभव सहायता में तत्पर रहते हैं। चुनावों के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए इन्हीं तत्वों से उन्हें बहुत सस्ती शराब मिलती है और जरुरत पर आर्थिक सहयोग में भी यही तत्व पीछे नहीं रहते।


हरियाणा मार्का शराब का कारोबार भी तेजी पर है

जनपद में इस धंधे में ज्यादातर ऐसे तत्व लगे हैं, जो बेरोजगार होते हुए हसीन सपनों को साकार करने की हसरत पाले हुए हैं। इस धंधे से उनकी कल्पनाओं को पंख भी लगे हैं तथा कई ऐसे तत्व आज आलीशान भवनों में, सर्वसुलभ सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं। इनमें से कई ने राजनीति में भी कदम बढ़ाये हैं जिससे उनका सामाजिक रुतबा बढ़ा है। कई ऐसे लोग प्रमुख समाजसेवियों में शुमार हैं। अपने साथ इन लोगों ने सैकड़ों बेरोजगार नवयुवकों को जोड़कर उन्हें रोजगार प्रदान कर अपने पैरों पर खड़े होने लायक बनाया है। वास्तव में अवैध शराब का यह धंधा कई को बर्बाद जबकि बहुतों की जीविका का साधन बनता जा रहा है।

-एम.एस. चाहल.


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