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गजरौला पालिका में करोड़ों के भ्रष्टाचार की जांच की मांग

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सभासदों ने गजरौला के चेयरमेन हरपाल सिंह और इ.ओ. कामिल पाशा के खिलाफ़ मोर्चा खोल दिया है.

पालिका परिषद में अध्यक्ष और इ.ओ. द्वारा कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आधे से अधिक सभासद खुलकर मैदान में हैं। वार्ड 18 के सभासद अशोक कुमार सिंह इस मुहिम की अगुवाई कर रहे हैं। उनका दावा है कि चेयरमेन हरपाल सिंह और इ.ओ. कामिल पाशा ने मिलकर कई करोड़ रुपये हजम कर लिए। सभासद इस बड़े भ्रष्टाचार की जांच तक शासन से चेयरमेन के वित्तीय अधिकार सीज करने की मांग करने वाले हैं। इसके लिए उन्होंने विधायक एम. चन्द्रा की सहमति भी प्राप्त कर ली है।

सभासद अनिल अग्रवाल, हरजीत सिंह, डा. आशुतोष भूषण शर्मा, अमरीक सिंह, हरीशचन्द और ब्रिजेश कुमार के हस्ताक्षर युक्त अशोक कुमार सिंह दिले ने एक इस आशय का पत्र तैयार किया है।

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इस पत्र में स्पष्ट लिखा है कि वार्ड-4 के मायापुरी मोहल्ले में बूढ़े बाबू के तालाब के सौन्दर्यीयकरण के नाम पर एक करोड़ 27 लाख रुपयों का ठेका हुआ। इसमें तालाब की पक्की बाउंड्री करा कर इतिश्री कर दी। सभासदों के अनुसार इसमें मुश्किल से चार लाख का काम हुआ। जबकि चेयरमेन और इ.ओ. ने इसकी एवज में एक करोड़ 27 लाख का भुगतान कर लिया। इस प्रकार दोनों ने एक करोड़ 23 लाख हड़प लिये।

चेयरमेन पर आरोप है कि शमशान घाट की बाउंड्री कराने में भी एक करोड़ 20 लाख का ठेका दिया है। आरोप है कि यहां भी मात्र 5-6 लाख खर्च हुए और बाकी एक करोड़ से अधिक रुपये हजम करने की तैयारी है।

घटिया प्याऊ के लिए करोड़ों का बजट खर्च दिखाया। लोग गवाह है प्याऊ बंद पड़ी हैं। सौर ऊर्जा लाइटों, पीडब्ल्यूडी की सड़क पर करोड़ों की सड़क बनाकर जो बनते ही उखाड़ कर फेंक दी, करोड़ों बरबाद किये, तथा स्वागत होटल के पास बनते ही टूटी सड़क आदि में करोड़ों रुपयों को खपाया गया। इस तरह की कई करोड़ रुपयों के भ्रष्टाचार की शिकायतें सभासदों द्वारा की जा रही हैं।

अशोक कुमार का कहना है कि वे चुप नहीं बैठने वाले तथा गजरौला के विकास के लिए आये धन को चेयरमेन और इ.ओ. की जेब से निकलवा कर दम लेंगे। वे शासन से इसकी जांच की मांग कर रहे हैं तथा तबतक चेयरमेन और इ.ओ. के वित्तीय अधिकार सीज कराने की भी मांग कर रहे हैं।


इ.ओ. है भ्रष्टाचार के मूल में :
यहां जबसे हरपाल सिंह पालिकाध्यक्ष बने हैं, तभी से कई सभासद तथा नगर के दूसरे संगठनों से जुड़े कई लोग उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं। इन आरोपों में निर्माण कार्यों में अधोमानक सामग्री बिना स्थायी समाचार पत्रों में विज्ञापन दिये मनमर्जी ठेकेदारों को चुपके से ठेका देने आदि शामिल हैं।

ऐसे में कई सभासदों को या उनके अपने लोगों को ठेके देकर चेयरमेन और इ.ओ. ने बंदरबांट में शामिल कर लिया लेकिन सारे सभासद तो बिकाऊ नहीं। उनमें से बहुत से सारा पैसा ईमानदारी से लगवाना चाहते हैं। भ्रष्टाचार को सहन नहीं कर पाने वाले इन लोगों ने जिलास्तर तक शिकायतें भी की लेकिन वे जांचकर्ताओं ने लीपापोती कर चेयरमेन और इ.ओ. के हित में ही पूरी कीं। भ्रष्टाचार के तंबुओं में, धन की चकाचौंध में जांचकर्ताओं को एक भी बम्बू नजर नहीं आया। भ्रष्टाचार के तंबुओं के बम्बुओं को छुपाने में यहां तेरह सालों से जमा बैठा इ.ओ. सिद्ध हस्त हैं। उसने अपने इर्दगिर्द भ्रष्टाचारियों का एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार कर रखा है। सूबे के शासन और प्रशासन के सारे कानून कायदों पर वह भारी है तभी तो उसका यहां से स्थानांतरण तक नहीं हुआ। कुछ तो लालच है जो इ.ओ. गजरौला छोड़ना नहीं चाहता।

डीएम की मेहरबानी है इ.ओ. पर :
जिलाधिकारी वेदप्रकाश की इ.ओ. कामिल पाशा पर बहुत मेहरबानी है। उन्होंने इसका स्थानांतरण कराने के बजाय मंडी धनौरा पालिका का भी कार्यभार सौंप दिया। डीएम तक पहुंची कई जांच यूं ही रफादफा हो जाना भी दोनों अधिकारियों में सांठगांठ का प्रमाण है। पालिकाध्यक्ष हरपाल सिंह भी पुराने तजुर्बेकार इ.ओ. का स्थानांतरण नहीं चाहते।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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