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मांस की दुकानों से बढ़ रही गंदगी- सैकड़ों बीमार

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सड़क सेे गुज़रना दूभर हो गया है. पुलिस और गजरौला नगर पालिका मूकदर्शक बनी हुई है.

वार्ड-दस में रेलवे स्टेशन फाटक के पास घनी आबादी के बीच खुली मांस की दुकानों के कारण जहां कई सौ लोग भयंकर बीमारियों की चपेट में हैं, वहीं आसपास के घरों में फैल रही महामारी से लोगों में भय तथा आक्रोश बढ़ रहा है। नगर पंचायत अध्यक्ष हरपाल सिंह तथा इ.ओ. कामिल पाशा से कई सभासदों द्वारा की गयी शिकायत के बावजूद समस्या का निदान नहीं हुआ। इससे लोगों में और भी रोष व्याप्त हो गया है। यदि समय रहते यहां सफाई व्यवस्था नहीं सुधरी तो शांति भंग का भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। पुलिस द्वारा मांस विक्रेताओं को सड़क पर गंदगी तथा अतिक्रमण को न रोकने से हालत और भी खराब होती जा रही है।

ओवरब्रिज के नीचे फाटक के पास मुर्गा, बकरा और सूअर के मीट की कई दुकानें हैं। यहां एक शराब की दुकान भी है। अंडों के ठेलों की भी भरमार रहती है। ओवरब्रिज पर चढ़ने-उतरने की सीढ़ियां हैं। दोनों ओर घनी आबादी और रेलवे स्टेशन तथा चौपला करीब होने से यहां आनेजाने वालों, खासकर पैदल लोगों की भारी तादाद रहती है। बुध, शुक्र और सोमवार, सप्ताह के तीन दिन यहां अलग-अलग स्थानों पर पैठ लगती है। ऐसे मौके पर तो यहां से गुजरने वालों की भीड़ और भी बढ़ जाती है। इन तीनों दिनों में ही मांस विक्रेता भी अधिक आते हैं। ऐसे में पुल के नीचे पूरी सड़क पर जगह-जगह तख्त लगाकर मांस विक्रेता खुलकर बेजुबानों का मांस बेचते हैं। मौके पर उन्हें काटकर अनावश्यक अंग सड़क व नालियों में डाल देते हैं। इससे पूरा इलाका गंदगी और दुर्गंध के कारण नारकीय रुप ले लेता है। कव्वे और दूसरे पक्षी अनावश्यक अंगों को लेकर निकटस्थ घरों की छतों या आंगन में खड़े पेड़ों पर बैठकर खाते हैं। आपसी छीनाझपटी में आंगन में गंदगी गिरती रहती है।

आवारा कुत्ते भी इस गंदगी पर छीनाझपटी करते हैं। नालियों में पहले से फैली गंदगी में इससे और इजाफा होता है। नाकफाड़ू़ बदबू के कारण लोगों का जीना दूभर है।

राह चलते लोग सड़कों पर खुलेआम बिक रहे, कट रहे मांस से मुंह दबाकर गुजरते हैं। सनातनी और शाकाहारी लोग अधिक परेशान हैं।

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पालिका सभासदों और चेयरमेन की कोशिश नाकाम विधायक आड़े आया :
इसी स्थान पर एक नामित सभासद तथा एक निर्वाचित सभासद का घर है। लोगों ने उनसे शिकायत की तो नामित सभासद हरीशचन्द ने कई सभासदों अनिल अग्रवाल, अमरीक सिंह, सोनी सिंह, संजय अग्रवाल, चन्द्रपाल, विजय कुमार, हरिओम, सरोजबाला आदि के हस्ताक्षरयुक्त इस संबंध में एक पत्र पालिकाध्यक्ष और इ.ओ. को सौंपा। उन्होंने कार्रवाई का भी आश्वासन दिया।

हरीशचन्द के मुताबिक पालिका प्रशासन से अतिक्रमण हटवाकर, सफाई व्यवस्था लागू कराने को पुलिस का भी सहयोग लिया लेकिन गंदगी फैलाने वालों को दूसरे विधानसभा क्षेत्र के सपा विधायक का सहारा मिलने से पुलिस को बैरंग वापस लौटना पड़ा। क्षेत्रीय विधायक जिले के दूसरे विधायकों के सामने बहुत कमजोर हैं। इसलिए उनकी नहीं चलती।

निदान नहीं हुआ तो शांति भंग की आशंका :
पुल के दोनों ओर की आबादी में गंदगी से फैल रही बीमारियों से लोगों में भय और रोष व्याप्त है। लगभग सभी परिवारों में कोई न कोई मरीज है और कई परिवारों के तो सभी सदस्य रोग पीड़ित हैं। ऐसे में लोगों में भय और रोष स्वाभाविक है। लोगों का रोष शांति भंग का कारण बन सकता है।

समस्या तब से अधिक बढ़ी है जबसे घंटों सड़क पर मुर्गों से लदे वाहन खड़े कर यहां सुबह उस समय मंडी लगायी जाती है जब लोग अपने काम तथा बच्चे स्कूलों को जाते हैं। यहां उस समय दूसरे स्थानों से भी लोग मुर्गे खरीदने आते हैं। इन बीमार पंछियों की दुर्गंध और उनसे निकलकर उड़ते सूक्ष्म जहरीले जंतु लोगों के घरों और पूरे वातावरण को रोगाणुओं तथा विषाणुओं से भर देते हैं। यहां सांस लेने से भी खतरनाक संक्रमण का खतरा है। यहां निवास कर रहे रिटायर्ड फार्मेसिस्ट बुद्धि सिंह का कहना है कि बीमार मुर्गे-मुर्गियां लदी गाड़ियां यहां महामारी को खुला निमंत्रण दे रही हैं। यह व्यापार आबादी से दूर होना चाहिए। जबसे इनकी मंडी शुरु हुई है मोहल्ले में बीमारियां तेजी से बढ़ी है। यही हाल रहा तो लोग आपे से बाहर होकर कुछ भी कर सकते हैं। बेमौत मरने को कोई तैयार नहीं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.
(pic : file)


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