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दलित का पैसा सामान्य आबादी में लगाया

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अदालत ने मामला नगर विकास सचिव को सौंपा, यह आदेश पालिका पार्षद आसिफ अली की जनहित याचिका पर दिया गया है.

नगर पालिका में विकास कार्यों में दलितों के साथ भेदभाव की शिकायत का निपटारा करने का आदेश उच्च न्यायालय ने नगर विकास सचिव को दिया है। यह आदेश पालिका पार्षद आसिफ अली की जनहित याचिका पर दिया गया है।

उल्लेखनीय है, बछरायूं पालिका परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार के कई मामले कुछ पार्षदों द्वारा समय-समय पर उठाये जाते रहे हैं। कई लोग इस तरह की शिकायतें डीएम से भी कर चुके लेकिन सत्ता के दबाव में शिकायतकर्ताओं की सुनवाई नहीं होती। पिछले दिनों सरकार ने नगर की उपेक्षित दलित आबादी में विकास के लिए पांच करोड़ रुपये भेजे थे। आसिफ अली का कहना है कि यह धन दलित बाहुल्य आबादी के बजाय सामान्य आबादी में खर्च कर दिया। उन्होंने इस मामले को पालिकाध्यक्ष और इ.ओ. के सामने भी उठाया। सुनवाई न होने पर वे डीएम के पास भी गये। उनसे लिखित शिकायत भी की लेकिन कार्रवाई तो क्या जांच तक नहीं की गयी। इधर-उधर भागदौड़ के बाद हारकर उन्होंने इलाहबाद हाइकोर्ट की शरण ली। जहां उनकी जनहित याचिका पर अदालत ने नगर विकास सचिव को कानूनी दायरे में न्याय दिलाने का आदेश दिया है।

आसिफ अली नामित पार्षद हैं तथा धर्मनिरपेक्ष छवि के ऐसे व्यक्ति हैं जो कमजोरों के लिए बराबर संघर्ष करते आये हैं। उनका कहना है कि पालिका ने दलितों के हक पर डाका डाला है, जिसकी भरपाई पालिका को करनी होगी।

-टाइम्स न्यूज़ बछरायूं.


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