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गौरक्षक, गौभक्षक, सफेदपोश और खाकी की साझेदारी

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अमरोहा जिले में गौ भक्तों और पशु प्रेमियों की भरमार है, लेकिन या तो ये लोग उदासीन हैं या ऐसे तत्वों से मिले हुए हैं अथवा भयवश कुछ भी करने को तैयार नहीं.

बंद गौशाला को पशु सुपुर्दगी की जांच में हकीकत सामने आयेगी और दोषी कानूनी शिकंजे में फंसेंगे, कुछ नहीं कहा जा सकता। भले ही लखनऊ तक पहुंच चुके इस मामले पर गंभीर पड़ताल की चर्चा हो। इस तरह की जांच जब भी की जाती है, उसमें विभागीय अधिकारी पहला प्रयास अपने अधीनस्थों को बचाने के बिन्दू तलाशते हैं और प्रायः ऐसा कर लिया जाता है। भारी प्रयास के बाद भी बचाव का जब कोई बिन्दू नहीं मिलता, तो जांच लंबी खींची जाती है। कभी-कभी जांच अधिकारी बदल दिया जाता है, तो कभी बात आयी-गयी करने का भी प्रयास होता है। बहुत ही दुर्लभ मामलों में अधिकारी लपेटे में आते हैं। कई बार किसी छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बनाने का भी प्रयास किया जाता है। कुल मिलाकर विभागीय जांच में बहुधा दोषी अफसर निर्दोष करार दिये जाते हैं। जब अफसरशाही पर सत्ताधारी नेता हावी हों और अपराधियों को ऐसे ताकतवर नेताओं का संरक्षण प्राप्त हो, तो जांचकर्ता से निष्पक्ष जांच की आशा करना समझदारी से कोसों दूर की बात है।

भले ही कहा जा रहा है कि यह मामला आईजी के साथ लखनऊ तक पहुंच गया है। परंतु जांच के तरीके तथा यहां हो रहे वर्षों से गौवध और ऊंट कटान की घटनायें, जो इशारा कर रही हैं, उससे इस तरह के अपराधों में संलग्न तत्वों का कोई बाल बांका भी नहीं करने वाला। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार के गठन और अमरोहा के नेताओं को थोक में लालबत्तियां बंटने के बाद अवैध मांस का कारोबार धड़ल्ले से बढ़ा है। इसमें जिले के बड़े नेता, पुलिस और गौभक्षक से लेकर गौ रक्षक तक एक हो गये हैं।

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नौगावां सादात में मौलाना आब्दी के दर्जा राज्यमंत्री बनने से पहले कभी ऊंट कटान की खबरें नहीं आयीं। उन्हें सत्ता मिलने के बाद यहां अवैध रुप से ऊंट काटे जा रहे हैं। जिसकी खबरें आयेदिन अखबारों की सुर्खियां बन रही हैं। वधकर्ता भी वही हैं, वध स्थल भी वही है, वही खाकी और वही सफेदपोश, कोई रोकटोक नहीं।

ऊंट विशाल पशु है। जो यहां देखने को नहीं मिलता। राजस्थान से यहां तक उसे मुट्ठी में दबाकर या कान में डालकर भी नहीं लाया जाता, वह भी एक दो नहीं दर्जनों की तादाद में लाया जाता है। उनका वध करके मांस, खाल, चर्बी और हड्डियां तक बेच दी जाती हैं। क्या यह संभव है कि इसकी पुलिस को भनक तक नहीं लगती। पुलिस पर सत्ता का दबाव और चांदी के जूते की मार है, जिसके आगे वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करती।

जिले में गौ भक्तों और पशु प्रेमियों की भरमार है, लेकिन या तो ये लोग उदासीन हैं या ऐसे तत्वों से मिले हुए हैं अथवा भयवश कुछ भी करने को तैयार नहीं। लोग बीमार या लाचार मां-बाप और नाते-रिश्तेदारों तक से किनारा कर रहे हैं तो ऐसे वातावरण में मूक तथा लाचार पशुओं के लिए इंसानियत दिखाने वाले तो दुर्लभ ही हैं।

जब उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के सदस्य को यह पता चल गया कि 29 गायें, पांच थानों से उस गौशाला की सुपुर्दगी में दर्शायी हैं जो अस्तित्व में ही नहीं। पुष्टि एसपी की भी है, तो प्रथम दृष्टया पांचों थानों के थानेदार तो दोषी दिखायी दे रहे हैं। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आधार तो बन ही गया। जांचकर्ता एएसपी को सारा पता होगा कि जिले में अवैध पशु वध हो रहा है। इस तरह के मामले पकड़ में आते रहते हैं। कई नेताओं का दबाव पड़ने पर ऐसे तत्वों को रियायत दी जाने की खबरें भी आम हैं। वो यह भी जानते होंगे कि इससे पूर्व भी इस तरह की गौशाला की सुपुर्दगी में बिना दिये ही पशु दिखाये गये होंगे। बिना जांच के ही कोई भी जिले के हालात पर बता सकता है कि इस तरह के पशु गौशालाओं के बजाय पशु वधशालाओं को बेचे जाते हैं।

गौसेवा आयोग भी संदेह के घेरे में :
गजरौला, अमरोहा देहात, रजबपुर, डिडौली और हसनपुर थाना क्षेत्रों से सौंपे पशुओं के मामले की जांच तो उत्तर प्रदेश गौसेवा आयोग के सदस्य के स्थलीय परीक्षण में गौशाला न मिलने के कारण शुरु हुई है।

यह गौशाला वर्षों से बंद है। कितनी मजेदार बात है कि पुलिस पकड़े पशु भी इसी के सुपुर्दगी में देती आ रही है। 29 पशु तो एक माह में गये हैं। उससे पहले पता नहीं कितने पशु यहां दिये, दिखाये गये होंगे? जांच का यह विषय भी होना जरुरी है।

ऐसे में जांच के घेरे में उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग भी आता है। सदस्य राहुल कुमार के अनुसार वे गौशाला का अनुदान बढ़ाना चाहते थे। इसका मतलब तो यह हुआ कि आयोग बंद गौशाला को अबतक बराबर अनुदान देता आ रहा था। यह भी जांच के दायरे में होना चाहिए।

लखनऊ से चली जांच भी नीचे आकर भटक जाती है :
कई मामलों में इस तरह की जांच लखनऊ से जिला और तहसील होती हुई जांच के घेरे में आये तत्वों तक आ जाती है। जिनका परिणाम वही होता है, जो वही चोर, वही जज की कहावत चरितार्थ करती है।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.


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